नियंत्रण एवं समन्वय – कक्षा 10

 



नियंत्रण एवं समन्वय (Class X)


1. नियंत्रण एवं समन्वय क्या है?

जीवों के शरीर में ऐसी व्यवस्था होती है जिससे

  • शरीर के सभी अंग ठीक से काम करते हैं
  • सभी अंग एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं
  • शरीर की क्रियाएँ समय पर होती रहती हैं

इस व्यवस्था को नियंत्रण एवं समन्वय कहते हैं।

👉 सरल शब्दों में:
शरीर के सभी कामों को सही ढंग से चलाना और अंगों में तालमेल बनाए रखना ही नियंत्रण एवं समन्वय है।


2. नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता

नियंत्रण एवं समन्वय बहुत आवश्यक है क्योंकि—

  • बाहरी उद्दीपनों जैसे गर्मी, ठंड, दर्द, प्रकाश आदि पर सही प्रतिक्रिया देने के लिए
  • शरीर के विभिन्न अंगों (हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क आदि) के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए
  • उपापचय, श्वसन, हृदयगति जैसी जीवन क्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए
  • बदलते पर्यावरण में जीवित रहने के लिए

3. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)

(क) तंत्रिका तंत्र के कार्य

तंत्रिका तंत्र के मुख्य कार्य हैं—

  1. बाहरी और आंतरिक सूचनाओं को ग्रहण करना
    जैसे – आँख से देखना, कान से सुनना, त्वचा से महसूस करना

  2. शरीर के भागों तक संदेश पहुँचाना
    ताकि सही समय पर सही प्रतिक्रिया हो सके


(ख) तंत्रिका तंत्र के भाग

तंत्रिका तंत्र के तीन मुख्य भाग होते हैं—

  • मस्तिष्क (Brain)
  • मेरुरज्जु (Spinal Cord)
  • तंत्रिकाएँ (Nerves)

(ग) तंत्रिका तंत्र की इकाई

👉 तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई को
तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन (Neuron) कहते हैं।


(घ) न्यूरॉन के भाग

न्यूरॉन के चार मुख्य भाग होते हैं—

  • कोशिकाकाय – संदेश को नियंत्रित करता है
  • दुमिका (डेंड्रॉन) – संदेश ग्रहण करती है
  • तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) – संदेश आगे भेजता है
  • तंत्रिका सिरा – अगले न्यूरॉन से जुड़ता है

(ङ) सिनेप्स (अंतर्ग्रथन)

दो न्यूरॉनों के बीच की खाली जगह को सिनेप्स कहते हैं।
यहाँ पर न्यूरोट्रांसमीटर रसायनों की मदद से
विद्युत आवेग (संदेश) एक न्यूरॉन से दूसरे में जाता है।


4. मानव मस्तिष्क

(क) शरीर का प्रमुख समन्वय केंद्र

👉 मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण और समन्वय केंद्र है।


(ख) मस्तिष्क के भाग

मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग होते हैं—

  1. अग्र मस्तिष्क

    • सेरिब्रम
    • हाइपोथैलेमस
  2. मध्य मस्तिष्क

  3. पश्च मस्तिष्क

    • पॉन्स
    • मेडुला
    • अनुमस्तिष्क

(ग) मस्तिष्क के प्रमुख कार्य

  • अनुमस्तिष्क → शरीर का संतुलन और सही स्थिति बनाए रखना
  • मेडुला → श्वसन, हृदयगति, रक्तदाब नियंत्रित करना
  • पॉन्स → श्वसन क्रिया को नियंत्रित करना

5. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

(क) परिभाषा

किसी उद्दीपन के प्रति होने वाली
त्वरित, अनैच्छिक और बिना सोचे प्रतिक्रिया
को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।


(ख) उदाहरण

  • गरम वस्तु छूने पर तुरंत हाथ हटाना
  • आँख में धूल जाने पर पलक बंद हो जाना

(ग) प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)

प्रतिवर्ती क्रिया में संदेश जिस मार्ग से जाता है,
उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।

इसके घटक हैं—

  1. ग्राही अंग
  2. संवेदी तंत्रिका
  3. मेरुरज्जु
  4. प्रेरक तंत्रिका
  5. कार्यकारी अंग

6. अनैच्छिक एवं प्रतिवर्ती क्रिया में अंतर

अनैच्छिक क्रिया प्रतिवर्ती क्रिया
पश्चमस्तिष्क द्वारा नियंत्रित मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित
अपेक्षाकृत धीमी अत्यंत तीव्र
सोच शामिल सोच शामिल नहीं

7. हार्मोन एवं रासायनिक समन्वय (जन्तु)

(क) हार्मोन क्या हैं?

हार्मोन रासायनिक पदार्थ होते हैं,
जो अंतःस्रावी ग्रंथियों से निकलकर
रक्त के माध्यम से शरीर के अंगों तक संदेश पहुँचाते हैं


(ख) प्रमुख ग्रंथियाँ व हार्मोन

  • पीयूष ग्रंथि → वृद्धि हार्मोन
  • थायरॉइड ग्रंथि → थायरॉक्सिन
  • अग्नाशय → इंसुलिन
  • अधिवृक्क ग्रंथि → एड्रीनलीन
  • पैराथायरॉइड ग्रंथि → पैराथॉर्मोन

(ग) हार्मोन की कमी से होने वाले रोग

  • वृद्धि हार्मोन की कमी → बौनापन
  • थायरॉक्सिन की कमी → घेंघा
  • इंसुलिन की कमी → मधुमेह

8. पादपों में नियंत्रण एवं समन्वय

(क) पादप हार्मोन (फाइटोहार्मोन)

पौधों में पाए जाने वाले हार्मोन—

  • ऑक्सिन
  • जिबरेलिन
  • साइटोकाइनिन
  • एब्सिसिक अम्ल
  • एथिलीन

(ख) पादप हार्मोन के कार्य

  • ऑक्सिन → तने की वृद्धि, प्रकाशानुवर्तन
  • जिबरेलिन → तने की लंबाई बढ़ाना
  • एब्सिसिक अम्ल → वृद्धि को रोकना

9. पादपों में गति

(क) अनुवर्तन

  • प्रकाशानुवर्तन
  • गुरुत्वानुवर्तन
  • जलानुवर्तन
  • रसायनानुवर्तन

(ख) अनुकुंचन गति

👉 छुई-मुई पौधे की गति अनुकुंचन गति का उदाहरण है।


10. पादप व जन्तु हार्मोन में अंतर

पादप हार्मोन जन्तु हार्मोन
ग्रंथियाँ नहीं होती अंतःस्रावी ग्रंथियाँ होती हैं
दिशिक अदिश

11. निष्कर्ष

नियंत्रण एवं समन्वय जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इसके बिना शरीर की कोई भी क्रिया सही ढंग से नहीं हो सकती।

  • जन्तुओं में → तंत्रिका तंत्र और हार्मोन
  • पादपों में → हार्मोन और अनुवर्तन


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