Class 10th history चैप्टर 1

 

राष्ट्रवाद in यूरोप — सुपर क्लियर & बिग-साइज़ नोट्स

(Class 10 — History)


🔵 1. जनमत संग्रह (Plebiscite)

किसी क्षेत्र के लोगों की राय/विचारों का संग्रह = जनमत संग्रह
यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार है।


🔵 2. नृजातीय (Ethnic) का अर्थ

किसी समुदाय की साझा नस्ल, जनजातीय या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को नृजातीय कहा जाता है।
यह समुदाय की पहचान को दर्शाता है।


🔵 3. फ्रांस में राष्ट्रवाद कैसे विकसित हुआ? (French Revolution → Nationalism)

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने लोगों में “एक राष्ट्र” की भावना जगाने के लिए ये कदम उठाए:

✔ (1) ‘पितृभूमि’ और ‘नागरिक’ जैसे विचार फैलाए

→ नागरिक = समान अधिकार
→ संयुक्त राष्ट्र की कल्पना

✔ (2) नया तिरंगा झंडा अपनाया

→ पुराने राजध्वज की जगह

✔ (3) Estate General का चुनाव सक्रिय नागरिकों ने किया

→ नाम बदला: National Assembly

✔ (4) राष्ट्रवादी गीत, स्तुतियाँ, शपथें, स्मारक

→ राष्ट्रीय भावना मज़बूत

✔ (5) एक केंद्रीय प्रशासन

→ पूरे देश के लिए समान कानून

✔ (6) आंतरिक शुल्क समाप्त

→ माप-तौल की एक समान व्यवस्था लागू

✔ (7) फ्रेंच भाषा को राष्ट्रभाषा बनाया


🔵 4. फ्रांसीसी क्रांति (1789) के मुख्य परिणाम

✔ (1) राजतंत्र समाप्त → गणतंत्र स्थापना

→ स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व

✔ (2) राष्ट्रवाद का जन्म

→ सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक भेदभाव खत्म

✔ (3) पादरियों के अधिकार सीमित

→ धार्मिक स्वतंत्रता

✔ (4) National Assembly शक्तिशाली

→ समान कानून, कर व्यवस्था नियंत्रित

✔ (5) सामंती अर्थव्यवस्था खत्म → पूँजीवादी व्यवस्था शुरू

✔ (6) नागरिकों के मौलिक अधिकार घोषित

✔ (7) यूरोप में अन्य क्रांतियों की शुरुआत


🔵 5. नेपोलियन बोनापार्ट कौन था?

फ्रांस का महान सेनानायक → बाद में फ्रांस का प्रथम सम्राट
उसकी बनाई नेपोलियन संहिता बहुत प्रसिद्ध है।


🔵 6. नेपोलियन संहिता की मुख्य विशेषताएँ

✔ (1) जन्म आधारित विशेषाधिकार समाप्त

✔ (2) कानून के सामने बराबरी

✔ (3) किसानों को भू-दासत्व से मुक्ति

✔ (4) फ्रांसीसी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में भी लागू

✔ (5) संचार, यातायात, मुद्रा और माप-तौल एक-समान


🔵 7. वियना सम्मेलन (1815)

✔ नेपोलियन की हार के बाद आयोजित

✔ मेजबानी: ड्यूक मैटरनिख (ऑस्ट्रिया)

✔ सहभागी देश: इंग्लैंड, रूस, प्रशा, ऑस्ट्रिया

मुख्य निर्णय

  1. रूढ़िवादी शासन बहाली
  2. फ्रांस में राजतंत्र वापस (बूर्बो वंश)
  3. पुराने राजाओं की पुनर्स्थापना
  4. फ्रांस से जीते क्षेत्र वापस लिए
  5. फ्रांस की सीमाओं पर सुरक्षा-राज्य बनाए
  6. जर्मन परिसंघ (39 राज्य) रखा गया
  7. रूस को पोलैंड का हिस्सा, प्रशा को सैक्सनी का हिस्सा

🔵 8. उदारवाद (Liberalism)

→ स्वतंत्रता
→ समानता
→ जनता की सहमति से सरकार
→ विशेषाधिकारों का विरोध
→ नागरिकों के मताधिकार का समर्थन


🔵 9. रूढ़िवाद (Conservatism)

→ पुरानी परंपराएँ बनाए रखना
→ राजतंत्र, चर्च, संपत्ति की रक्षा
→ परिवर्तन का विरोध


🔵 10. 1848 की उदारवादी क्रांति

✔ राजतंत्र खत्म करना

✔ गणतंत्र स्थापित करना

✔ स्वतंत्रता, समानता, राष्ट्रवाद

✔ फ्रांस में सम्राट का पतन

✔ 21+ पुरुषों को मताधिकार


🔵 11. रूपक (Allegory)

अमूर्त विचारों को किसी मूर्त आकृति में दिखाना → रूपक


🔵 12. मारिआन (France) और जर्मेनिया (Germany)

मारिआन (France)

  • नारी रूपक
  • प्रतीक: लाल टोपी, तिरंगा, कलगी
  • स्वतंत्रता, गणतंत्र की छवि

जर्मेनिया (Germany)

  • बलूत पत्तों का मुकुट (वीरता का प्रतीक)
  • जर्मन एकता, शक्ति, स्वतंत्रता का प्रतीक

🔵 13. संस्कृति और राष्ट्रवाद

🌟 संस्कृति = भाषा + लोक परंपराएँ + संगीत

→ लोगों में एकता और समान भावना
→ पोलैंड में भाषा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
→ लोकगीत, लोककाव्य जनता को जोड़ते थे





पर उस क्षेत्र के निवासिया के विचारों के संग्रह का जनमत संग्रह कहा जाता है। जनमत संग्रह लोकतंत्र का आधार है। >


प्रश्न : नृजातीय से क्या अभिप्राय है?


उत्तर : किसी समुदाय के एक साझा नस्ली जनजातीय या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को नृजातीय के नाम से जाना जाता है। यह समुदाय की पहचान को सुनिश्चित करता है।


क्रांतिकारियों ने क्या-क्या कदम उठाये?


→ प्रश्न: फ्रांसीसी लोगों में सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी


▶ अथवा, फ्रांस में राष्ट्रवाद का विकास कैसे हुआ?


उत्तर : फ्रांस के नागरिकों में सामूहिक पहचान अथवा 'एक राष्ट्र' के नागरिक होने का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों द्वारा निम्नांकित उपाय किये गये -


(1) फ्रांसीसी क्रान्तिकारियों ने 'पितृभूमि' तथा 'नागरिक' जैसे विचारों को फ्रांसीसी लोगों तक पहुँचाया। इन विचारों ने एक संयुक्त समुदाय के विचार पर बल दिया। इस संयुक्त समुदाय को एक संविधान के अन्तर्गत समान अधिकार प्राप्त थे।


(2) एक नया फ्रांसीसी झण्डा तिरंगा चुना गया जिसने पहले के राजध्वज का स्थान ले लिया।


(3) इस्टेट जनरेल का चुनाव सक्रिय नागरिकों के समूह द्वारा किया जाने लगा। इसका नाम बदल कर नेशनल एसेम्बली' कर दिया गया।


' (4) राष्ट्रीय भावना को प्रोत्साहित करने के लिए नई स्तुतियों की रचना की गर्मी, शपथें ली गयीं तथा शहीदों का गुणगान किया गया।


(5) एक केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गयी, जिसने अपने अधीन राज्यों में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।


(6) आन्तरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिये गये तथा सम्पूर्ण देश में माप-तौल की एकसमान प्रणालियाँ लागू की गयीं।


(7) क्षेत्रीय बोलियों के स्थान पर फ्रेंच सम्पूर्ण देश की भाषा बन गयी।


प्रश्न : फ्रांसीसी क्रांति का मुख्य परिणाम क्या था?


→ अथवा, 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप हुए परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।


उत्तर : (1) 1789 की फ्रांसीसी क्रान्ति के परिणामस्वरूप फ्रांस में राजतंत्र समाप्त हुआ और उसके स्थान पर गणतंत्र की स्थापना हुई जिसमें स्वतंत्रता, समानता तथा बन्धुत्व को प्रोत्साहन मिला। सामन्तवाद का अन्त हो गया।


(2) क्रान्ति से राष्ट्रवाद स्थापित हुआ। फ्रांस में नये राष्ट्रवादी समाज का निर्माण हुआ। यह समाज समानता, स्वतंत्रता एवं बन्धुत्व के सिद्धांत पर आधारित था। फ्रांस में सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक भेदभाव समाप्त कर दिये गये।


(3) पादरियों के अधिकारों में कमी कर दी गई। उनका अधिकार क्षेत्र अब चर्च तक ही सीमित कर दिया गया। जनता को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान की गई।


(4) राष्ट्रीय सभा की शक्ति बढ़ा दी गई। राष्ट्रीय सभा ने फ्रांस में गणतन्त्र की घोषणा कर दी। नये कानून एवं कर इसी सभा द्वारा पास होने लगे। अब सबके लिए एक जैसे कानून थे।


(5) इस क्रांति के बाद सामंती अर्थतंत्रीय प्रणाली को समाप्त कर नई पूँजीवादी अर्थतंत्रीय प्रणाली का निर्माण हुआ।


(6) फ्रांस की नेशनल एसेम्बली ने व्यक्ति की महत्ता पर बल दिया। नागरिकों के मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की घोषणा की गई।

सामाजिवउ विज्ञान (Class X)


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7


(7) फ्रांसीसी क्रान्ति ने पूरे यूरोप के शिक्षित अभिजात वर्ग में राष्ट्रवाद की भावनाओं का संचार कर दिया। इसके कारण यूरोप के अन्य देशों में राजतंत्र और सामंतवाद के खिलाफ क्रांतियों की शुरुआत हुई।


> प्रश्न : नेपोलियन बोनापार्ट कौन था?




उत्तर : नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक महान सेनानायक था जिसके नेतृत्व में फ्रांस ने अनेक विजय प्राप्त कीं तथा बाद में उसे फ्रांस का पहला सम्राट घोषित किया गया।


उसके द्वारा शासन व्यवस्था के लिए बनायी गयी आचार संहिता प्रसिद्ध है।


▶ प्रश्न : नेपोलियन संहिता की तीन मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?


अथवा, नेपोलियन संहिता की व्याख्या कीजिए।


अथवा, नेपोलियन के किन्हीं तीन प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करें।


▶ अथवा, अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने क्या किया? किन्हीं तीन का उल्लेख करें।


उत्तर : शासन व्यवस्था को कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने नेपोलियन संहिता को लागू किया


जिसके अन्तर्गत उसने निम्नलिखित प्रमुख बदलाव किए -


(1) जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिये गये।


2. कानून के समक्ष बराबरी और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया।




( (3) सामन्ती व्यवस्था को खत्म किया और किसानों को भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति


दिलाई।


(4) इस संहिता को फ्रांसीसी नियंत्रण के अधीन क्षेत्रों में भी लागू किया गया तथा प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया गया। शहरों में कारीगरों के श्रेणी-संघों के नियंत्रणों को हटा दिया गया।


(5) यातायात और संचार-व्यवस्थाओं को सुधारा गया। एक-समान कानून, मानक भार तथा नाप और एक राष्ट्रीय मुद्रा से एक इलाके से दूसरे इलाके में वस्तुओं और पूँजी के आवागमन में सहूलियत हुई।


> प्रश्न : वियना सम्मेलन (1815) क्या था?




उत्तर : नेपोलियन की पराजय के बाद 1815 में वियना में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें आस्ट्रिया, प्रशा, इंग्लैण्ड, रूस आदि देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन की मेजबानी आस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मेटरनिख ने की। वियना सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने 1815 की वियना-सन्धि


तैयार की।


▶ प्रश्न: 1815 ई. में सम्पन्न वियना सम्मेलन की मुख्य बातें क्या थीं?


▶ अथवा, वियना कांग्रेस में लिये गये निर्णयों और उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।


उत्तर : 1815 ई. में सम्पन्न वियना सम्मेलन की मुख्य निर्णय/उद्देश्य निम्नलिखित थे -


(1) यूरोप में एक नयी रूढ़िवादी व्यवस्था को पुनः लागू किया गया।


(2) फ्रांस में राजतंत्र की बहाली कर बूर्बो वंश को शासन-सत्ता सौंप दिया गया।


(3) उन राजतंत्रों को फिर से बहाल किया गया जिन्हें नेपोलियन ने बर्खास्त कर दिया था।


(4) फ्रांस को उन प्रदेशों से वंचित कर दिया गया जिन पर नेपोलियन ने अधिकार कर लिया था। (5) फ्रांस की सीमाओं पर अनेक राज्यों की स्थापना की गई ताकि भविष्य में फ्रांस अपने साम्राज्य का


विस्तार न कर सके।


(6) नेपोलियन ने 39 राज्यों का जो जर्मन महासंघ स्थापित किया था, उसे बनाए रखा गया। (7) पूर्व में रूस को पोलैण्ड का एक हिस्सा दिया गया। प्रशा को सैक्सनी का एक हिस्सा दिया गया।


> प्रश्न : वियना कांग्रेस कब और किसके द्वारा आयोजित की गयी थी?




उत्तर : वियना कांग्रेस 1815 ई. में ऑस्ट्रिया के चांसलर मैटरनिख द्वारा आयोजित की गयी थी।


> प्रश्न : वियना सम्मेलन की मेजबानी किसने की थी?




उत्तर : ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख ने।


प्रश्न : यह कथन किसका है- "जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो


जाता है।"


> प्रश्न : वियना सम्मेलन में भाग लेने वाले चार प्रमुख दशा के नाम लिखिए जिनके प्रतिनिधि सम्मेलन में सम्मिलित हुए थे।




उत्तर : (1)


इंग्लैण्ड (2) रूस


(3) प्रशा


(4) आस्ट्रिया।



प्रश्न: 1815 की वियना संधि के क्या उद्देश्य थे?


उत्तर : वियना-सन्धि के प्रमुख उद्देश्य -


(1) फ्रांस तथा अन्य राजतंत्रों को फिर से बहाल करना जिन्हें नेपोलियन ने बर्खास्त कर दिया था।


(2) यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था स्थापित करना।


> प्रश्न : उदारवाद से क्या अभिप्राय है?




उत्तर : उदारवाद (Liberalism) की उत्पत्ति लैटिन भाषा के liber शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता


है - आजादी या स्वतंत्रता। व्यापक अर्थों में उदारवाद कानून के समक्ष समानता, आम सहमति से बनी सरकार, शासक वर्ग, पादरी वर्ग तथा कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति तथा सभी नागरिकों के लिए मताधिकार का समर्थन करता है।


> प्रश्न : 'रूढ़िवाद' से आप क्या समझते हैं? अथवा, रूढ़िवादी कौन थे?




उत्तर : रूढ़िवाद एक ऐसा राजनीतिक दर्शन है, जो आधुनिकता एवं परिवर्तन के स्थान पर स्थापित परंपराओं तथा रीति-रिवाजों को बनाये रखने पर बल देता है। रूढ़िवादियों की मूल धारणा यह है कि राजतंत्र, चर्च, सामाजिक भेदभाव, संपत्ति आदि को बनाये रखना चाहिए।


> प्रश्न : समन्वयवाद से क्या अभिप्राय है?




उत्तर : दो अलग-अलग मान्यताओं को उनकी भिन्नताओं तथा समानताओं को ध्यान में रखते हुए


साथ लाने का प्रयास समन्वयवाद के नाम से जाना जाता है।


▶ प्रश्न : उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का क्या अर्थ लगाया जाता है?


▶ अथवा, उदारवादी राष्ट्रवाद के क्या मायने थे?


उत्तर : उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का अर्थ था राजतन्त्र की समाप्ति एवं गणतन्त्र की स्थापना। उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति फ्रांस के मध्यमवर्गीय लोगों से सम्बन्धित थी। उदारवादियों की 1848 ई. की क्रांति का अर्थ राष्ट्रवाद के विजय तथा शेष विश्व में राष्ट्र-राज्यों के अभ्युदय से लगाया जाता है।


इस क्रांति में निरंकुश राजतन्त्र तथा पादरी एवं कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों का विरोध किया गया। मताधिकार पर आधारित संसदीय शासन, कानून के समक्ष सबकी बराबरी, आम जनता का आर्थिक कल्याण आदि पर जोर दिया गया। इस प्रकार उदारवाद गणतंत्र, राष्ट्र-राज्य, संविधानवाद, प्रेस की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता के संसदीय विचारों पर आधारित है।


इस क्रान्ति के फलस्वरूप फरवरी, 1848 में फ्रांस के सम्राट को सिंहासन छोड़ना पड़ा और फ्रांस में गणतन्त्र की स्थापना की गयी। यह गणतन्त्र पुरुषों के सर्वव्यापी मताधिकार पर आधारित था। >


प्रश्न : फ्रांस की 1848 की क्रान्ति का वर्णन कीजिए।


उत्तर : 1848 में खाद्यान्नों की कमी तथा व्यापक बेरोजगारी से परेशान पेरिसवासी सड़कों पर निकल


पड़े और फ्रांस के सम्राट को फ्रांस छोड़कर भागना पड़ा। राष्ट्रीय सभा ने फ्रांस में गणतन्त्र की घोषणा कर दी। 21 वर्ष से ऊपर सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार प्रदान किया गया और काम के अधिकार की गारण्टी दी गयी।


प्रश्न : उदारवादियों ने किन राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक विचारों को बढ़ावा दिया? उत्तर : उदारवादियों के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक विचार :


1. राजनीतिक विचार : (i) उदारवादियों ने निरंकुश राजतन्त्र तथा पादरी एवं कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों का विरोध किया। (ii) वे मताधिकार पर आधारित प्रतिनिधि संसदीय शासन का समर्थन करते थे। (iii) वे कानून के सामने समानता के पक्षपाती थे परन्तु सबके लिए मताधिकार के पक्ष में नहीं थे। (iv) राजा नहीं बल्कि राष्ट्र-राज्य के प्रति भक्ति का प्रचार-प्रसार।



2. सामाजिक विचार (1) समाज में स्वतंत्रता की भावना का विकास (ii) उदारवादियों ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार प्रदान करने की माँग की। (iii) भू-दासत्व तथा बन्धुआ मजदूरी को समाप्त करने पर बल दिया गया।

सामाजिवडे विज्ञान (Class X)




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3. आर्थिक विचार : उदारवादी बाजार व्यवस्था उदारवादियों ने बाजारों की मुक्ति, वस्तुओं तथा पूँजी के आयात-निर्यात पर राज्य द्वारा लगाए गए नियन्त्रणों को समाप्त करने पर बल दिया। जनता पर करों के बोझ में कमी करने का विचार दिया। उदारवादी निजी सम्पत्ति के स्वामित्व को अनिवार्य बना देना चाहते थे।




▶ प्रश्न : '1830 से 1848 तक का युग यूरोप के इतिहास में क्रान्तियों का युग था।' व्याख्या


कीजिए।


उत्तर : यूरोप के इतिहास में 1830 से 1848 तक का युग क्रान्तियों का युग कहलाता है क्योंकि इस अवधि में अनेक यूरोपीय देशों में निरंकुश, रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी शासन के विरुद्ध क्रान्तियाँ हुईं।


सर्वप्रथम फ्रांस में जुलाई, 1830 में क्रान्ति हुई। फ्रांस के उदारवादी क्रान्तिकारियों ने वहाँ के निरंकुश और रूढ़िवादी शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। परिणामस्वरूप फ्रांस के निरंकुश शासक बूर्बो को हटा कर संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया गया। इसका अध्यक्ष लुई फिलिप था।


इसके बाद 1830 में ब्रुसेल्स में भी विद्रोह भड़क उठा जिसके परिणामस्वरूप ब्रुसेल्स यूनाइटेड किंगडम ऑफ द नीदरलैण्ड्स से अलग हो गया। इसी अवधि में इटली और जर्मनी के राज्यों, आटोमन साम्राज्य के


प्रान्तों तथा आयरलैण्ड और पोलैण्ड में भी रूढ़िवादी तथा प्रतिक्रियावादी शासन के विरुद्ध क्रान्तियाँ हुईं। * प्रश्न : रूपक से आपका क्या तात्पर्य है?


उत्तर : जब किसी अमूर्त भावना या विचार को किसी मूर्त आकृति के रूप में दर्शाया जाता है तो इसे 'रूपक' कहा जाता है। जैसे टूटी जंजीर, मशाल, नारी के रूप में राष्ट्र का कल्याणकारी स्वरूप आदि जन-जन में राष्ट्रीयता की भावना को जगा देते हैं।


> प्रश्न : मारिआन से क्या तात्पर्य है?




उत्तर : 'मारिआन' नारी रूप में एक रूपक था जो फ्रांस में राष्ट्र तथा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक था।


प्रश्न : मारिआन तथा जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया? उसका क्या



महत्त्व था?


उत्तर : अठारहवीं तथा उन्नीसवीं सदी में कलाकारों ने राष्ट्रों के मानवीकरण अथवा राष्ट्रों को एक चेहरा देने के लिए 'रूपक' के रूप में नारी रूपों का व्यवहार किया। मारीआन और जर्मेनिया दो नारियों के चित्र हैं। इन्हें राष्ट्रों के रूपकों के रूप में चित्रित किया गया है। मारीआन फ्रांसीसी गणराज्य का प्रतिनिधित्व करती है और जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का रूपक है।


मारीआन: फ्रांसीसी क्रान्ति के दौरान कलाकारों ने स्वतन्त्रता, न्याय तथा गणतंत्र जैसे विचारों को व्यक्त करने के लिए नारी रूपक का प्रयोग किया। फ्रांस में नारी रूपक को लोकप्रिय ईसाई नाम 'मारीआन' दिया गया, जिसने जन-राष्ट्र के विचार को रेखांकित किया। उसके चिह्न भी स्वतंत्रता और गणतंत्र के थे -लाल टोपी, तिरंगा तथा कलगी। फ्रांस में एक डाक टिकट पर मारीआन की तस्वीर छापी। उसकी प्रतिमाओं को सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया ताकि लोगों में राष्ट्रीय भावना की जागृति हो।


जर्मेनिया : जर्मन राष्ट्र का रूपक थी। जर्मेनिया को बलूत वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहने दिखाया गया क्योंकि जर्मन बलूत को वीरता का प्रतीक मानते हैं। जर्मेनिया की तलवार पर जर्मन तलवार जर्मन साम्राज्य की रक्षा करती है अंकित है। नारी रूप में जर्मेनिया का चित्र जर्मनी की स्वतन्त्रता, राष्ट्रवाद तथा अखण्डता को प्रतिबिम्बित करता है।


महत्त्व : इन चित्रों ने लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को प्रबल किया तथा फ्रांस और जर्मनी को एक अलग-अलग राष्ट्र के रूप में पहचान दी। मारिआन की प्रतिमा को स्वतंत्रता, एकता और न्याय का प्रतीक माना गया। इससे जनता में इन उद्दात राजनीतिक भावनाओं का संचार हुआ। इसी प्रकार जर्मेनिया का चित्र स्वतंत्रता, शक्ति, बहादुरी, शांति तथा एक नये युग के सूत्रपात का प्रतीक था। जर्मनी की जनता को इससे राष्ट्र के गौरव का बोध हुआ।


▶ प्रश्न : राष्ट्रीय पहचान के निर्मित होने में भाषा और लोक परम्पराओं का क्या महत्त्व है? उत्तर : राष्ट्रीय पहचान के निर्माण में भाषा और लोक परम्पराओं का महत्त्व निम्नलिखित है-किसी क्षेत्र विशेष या देश की भाषा और लोक परम्पराएँ लोगों द्वारा एक साथ व्यतीत किए गए


अतीत व सामूहिक एकता से जीवन-यापन की जानकारी देती हैं। भाषा और लोक परम्पराएँ लोगों को सांस्कृतिक रूप से समान होने की भावना प्रदान करती - भाषा व लोक परम्पराएँ लोगों को एकता एवं गर्व के धागे से बाँधती हैं।

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CHAPTERWISE TOTAL STUDY MATERIAL


For Tests & JAC Board Exam,


प्रश्न : यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति के योगदान का उल्लेख कीजिए


4 अथवा, रूमानीवाद से आप क्या समझते हैं? रूमानीवाद ने राष्ट्रीयता की धारणा के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?


उत्तर : यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। रूमानीवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आन्दोलन था जो सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था।


यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति के निम्नलिखित पक्षों का योगदान प्रमुख था -(1) लोक संस्कृति : लोक संस्कृति क्षेत्र-विशेष के आम लोगों को सामूहिक एकता में पिरोती है।


लोक संगीत, लोक काव्य और लोक नृत्यों के माध्यम से राष्ट्र की भावना को प्रसारित किया गया।


(2) भाषा : राष्ट्रवाद के विकास में भाषा का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। उदाहरण के लिए पोलैण्ड में पोलिश भाषा-भाषियों ने रूसी भाषा का विरोध किया जो रूसी प्रभुत्व के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक था।


(3) संगीत : संगीत के द्वारा राष्ट्रीयता की भावना को आम लोगों तक पहुँचाने में सहायता मिली। पोलैण्ड में परतंत्रता की स्थिति में संगीत के द्वारा ही राष्ट्रीय भावना जागृत रखी गई।


> प्रश्न : ज्युसेपी मेत्सिनी कौन था?




उत्तर : ज्युसेपी मेत्सिनी इटली का एक महान क्रांतिकारी था। वह निरंकुश राजतंत्र का विरोधी एवं उदार लोकतंत्र का समर्थक था। उसने इटली के एकीकरण की रूपरेखा तैयार की।


> प्रश्न : ज्युसेपी मेत्सिनी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?




उत्तर : 1807 ई., जेनोआ में।


> प्रश्न : 'यंग इटली' क्या था? इसकी स्थापना किसने की?




उत्तर : 'यंग इटली' एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन था। इसकी स्थापना 1830 ई. के दशक में ज्युसेपी मेत्सिनी ने एकीकृत इटली के विचारों को प्रसारित करने के लिए की थी।


▶ प्रश्न : ज्युसेपी मेत्सिनी कौन था? राष्ट्रवाद के विकास में उसका क्या योगदान था?


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अथवा, ज्युसेपी मेत्सिनी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।


उत्तर : (1) ज्युसेपी मेत्सिनी इटली का एक महान क्रांतिकारी था। वह निरंकुश राजतंत्र का विरोधी एवं उदार लोकतंत्र का समर्थक था। उसने इटली के एकीकरण की रूपरेखा तैयार की।


(2) अपने विचारों को कार्य रूप देने के उद्देश्य से मेत्सिनी, कार्बोमारी के गुप्त संगठन का सदस्य बन गया। लिगुरिया में विद्रोह के आरोप में बहिष्कृत होने के बाद उसने दो भूमिगत संगठनों की स्थापना की। ये संगठन थे- 'यंग इटली' तथा 'यंग यूरोप'।


(3) मेत्सिनी का मानना था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई है। उसके प्रयासों से अन्ततः इटली का एकीकरण संभव हुआ।


▶ प्रश्न : एकीकरण से पहले इटली की राजनीतिक दशा कैसी थी?


उत्तर : (1) इटली अनेक वंशानुगत राज्यों तथा बहु-राष्ट्रीय हैब्सबर्ग साम्राज्य में विखरा हुआ था। 19वीं सदी के मध्य में इटली सात राज्यों में बँटा हुआ था। इनमें से सिर्फ एक राज्य सार्डिनिया-पीडमॉण्ट में इतालवी राजघराने का शासन था।


(2) उत्तरी भाग हैब्सबर्गों के अधीन था, मध्य इलाकों पर पोप का शासन था, जहाँ नेपोलियन की सेना उसकी सहायता कर रही थी।


(3) दक्षिणी क्षेत्र स्पेन के बूर्बो राजाओं के अधीन था। इटली की कोई साझी भाषा नहीं बन पायी थी।


कुल मिला कर इटली अनेक स्थानीय तथा क्षेत्रीय समूहों में बँटा हुआ था।


> प्रश्न : काउंट कैमिलो दे कावूर कौन था?




उत्तर : काउंट कैमिलो दे कावूर सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के शासक विक्टर इमैनुएल द्वितीय का मंत्री था। उसने इटली के एकीकरण आंदोलन का नेतृत्व किया तथा कूटनीति और प्रत्यक्ष युद्ध के माध्यम से वह


इटली का एकीकरण करने में सफल हुआ।


> प्रश्न: इटली में एकीकरण आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?




उत्तर : इटली में एकीकरण आंदोलन का नेतृत्व काउंट कैमिलो दे कावूर ने किया।

सामाजिवउ विज्ञान (Class X)


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11


प्रश्न : काउंट कैमिलो दे काबूर कौन था? इटली के एकीकरण में उसका क्या योगदान था? अथवा, काउंट कैमिलो दे कावूर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।


उत्तर : (1) काउंट कैमिलो दे कावूर सार्डिनिया-पौडमॉण्ट के शासक विक्टर इमैनुएल द्वितीय का मंत्री धा। कावूर ने इटली के एकीकरण आंदोलन का नेतृत्व किया।


(2) फ्रांस तथा सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के बीच कूटनीतिक संधि के पीछे कावूर का हाथ था। इस संचि के प्रभाव से सार्डिनिया-पीडमॉण्ट ऑस्ट्रिया को पराजित करने में सफल हुआ।


(3) कावूर समझता था कि ऑस्ट्रिया को इटली से बाहर किये बिना इटली का एकीकरण संभव नहीं है। ऑस्ट्रिया के पराजित होने के बाद इटली के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया।


इस प्रकार, कावूर ने कूटनीति तथा प्रत्यक्ष युद्ध के माध्यम से इटली का एकीकरण किया।


▶ प्रश्न : इटली एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।


अथवा, इटली के एकीकरण में शासक विक्टर इमेनुएल, मंत्री प्रमुख कावूर और ज्युसेपे गैरीबॉल्डी की भूमिका की चर्चा करें।


उत्तर : (1) ज्युसेपे मेत्सिनी का योगदान: इटली अपने एकीकरण के पूर्व सात राज्यों में बँटा हुआ


था। इनमें से केवल एक राज्य सार्डीनिया-पीडमांट में इतालवी राजवंश का शासन था। इटली के क्रान्तिकारी नेता ज्युसेपे मेत्सिनी ने 1831 में 'यंग इटली' नामक एक क्रान्तिकारी संस्था की स्थापना की और इसके माध्यम से इटलीवासियों में राष्ट्रीयता, देश-भक्ति, त्याग और बलिदान की भावनाएँ उत्पन्न की।


(2) कावूर का योगदान कावूर सार्जीनिया-पीडमांट का प्रधानमन्त्री था। 1859 में फ्रांस की सैनिक सहायता प्राप्त करके सार्डीनिया-पीडमांट ने आस्ट्रिया की सेनाओं को पराजित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप लोम्बार्डी को सार्डीनिया-पीडमांट में मिला लिया गया


(3) गैरीबाल्डी का योगदान: गैरीबाल्डी इटली का एक महान स्वतन्त्रता सेनानी था। उसने 1860 में सिसली और नेपल्स पर आक्रमण किया। गैरीबाल्डी के नेतृत्व में भारी संख्या में सशस्त्र स्वयं सेवकों ने इस युद्ध में हिस्सा लिया और उन पर अधिकार कर लिया। जनमत संग्रह के बाद सिसली और नेपल्स को सार्डीनिया-पीडमांट में मिला लिया गया।


(4) विक्टर इमेनुएल द्वितीय का योगदान : विक्टर इमेनुएल द्वितीय साडीनिया-पीडमांट का राजा था। युद्ध के जरिये इतालवी राज्यों को जोड़ने की जिम्मेदारी विक्टर इमेनुएल द्वितीय पर थी। 1861 में उसे एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।


1866 में वेनेशिया को भी इटली में मिला लिया गया। 1870 में इटली की सेनाओं ने रोम पर भी अधिकार कर लिया। इस प्रकार इटली का एकीकरण पूरा हुआ।


▶ प्रश्न : जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया संक्षेप में बताएँ।


उत्तर : (1) जॉलवेराइन की स्थापना 1834 ई. में प्रशा की पहल पर जॉलवेराइन नामक एक शुल्क संघ की स्थापना की गई जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य सम्मिलित हो गए। इस संघ ने शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया तथा मुद्राओं की संख्या केवल दो कर दी जो उससे पहले तीस से ऊपर थी। जॉलवेराइन से जर्मन राज्यों में राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ। इसने भविष्य में प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी के राजनीतिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया।


(2) फ्रैंकफर्ट संसद के प्रयास जर्मनी में राष्ट्रवादी भावनाएँ मध्य वर्ग के लोगों में अधिक थीं। उन्होंने सन् 1848 में जर्मन महासंघ के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर एक निर्वाचित संसद (फ्रैंकफर्ट संसद) द्वारा शासित राष्ट्र-राज्य बनाने का प्रयास किया। लेकिन राष्ट्र निर्माण का वह उदारवादी प्रयास राजशाही तथा सैन्य शक्ति ने मिलकर विफल कर दिया। उनका प्रशा के बड़े भू-स्वामियों ने भी समर्थन किया। (3) प्रशा का नेतृत्व तथा बिस्मार्क की भूमिका: इसके बाद प्रशा ने राष्ट्रीय एकीकरण के


आन्दोलन का नेतृत्व सम्भाला। प्रशा के राजा ने ऑटोवान बिस्मार्क को अपना प्रधानमंत्री घोषित किया। ऑटोवॉन बिस्मार्क ने प्रशा की सेना तथा नौकरशाही की सहायता ली।


बिस्मार्क ने 'लौह और रक्त' की नीति अपनाते हुए सात वर्ष की अवधि में डेनमार्क, आस्ट्रिया तथा प्रशा को युद्धों में पराजित कर दिया और जर्मनी का एकीकरण पूरा किया।। तो

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(4) जर्मन साम्राज्य की घोषणा 18 जनवरी, 1871 को बिस्मार्क ने वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम को नवीन जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया।


एकीकरण के पश्चात् नये जर्मन राज्य में मुद्रा, बैंकिंग, कानूनी तथा न्यायिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण पर बल दिया गया।


> प्रश्न : बिस्मार्क कौन था? उसने कौन सी नीति अपनायी?




उत्तर : बिस्मार्क प्रशा का चांसलर था। जर्मनी के एकीकरण में उसकी अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इसके लिए उसने 'खून और खड्ग' की नीति अपनायी।


> प्रश्न : 'जॉलवेराइन' नामक शुल्क संघ से आप क्या समझते हैं?




उत्तर : 1834 में प्रशा की पहल पर 'जॉलवेराइन' नामक एक शुल्क संघ स्थापित किया गया। इसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हो गये। इस व्यवस्था ने विभि

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