10th

प्रश्नोत्तर

खण्ड‑B: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1–8)

प्रश्न 1.

उत्तल लेंस में बनते हुए प्रतिबिम्ब का किरण आरेख खींचे जब वस्तु प्रकाश केन्द्र (O) और फोकस (F₁) के बीच रखा जाता है।

A

B 2F, F, B 2F,

प्रश्न 2.

नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?

अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता अथवा गुण जिसके द्वारा वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है समंजन कहलाती है।

अभिनेत्र लेंस से लगी सिलियरी मांसपेशियों द्वारा हमारे आँख के उत्तल लेंस की वक्रता बदलती रहती है। जब मांसपेशियाँ शिथिल अवस्था में होती हैं तो लेंस पतला हो जाता है, जिससे आँख के लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है तथा हमें दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। जब सिलियरी मांसपेशी सिकुड़ती है तो लेंस की गोलाई बढ़ती तथा फोकस दूरी कम होती है। जिससे हम नजदीक की वस्तु को स्पष्ट देख पाते हैं।

प्रश्न 3.

अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करता है?

अम्ल जल में घुलकर आयनों (धन एवं ऋण) का निर्माण करता है। इसलिए अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है।

उदाहरण:

HCl → H⁺ + Cl⁻

H₂SO₄ → 2H⁺ + SO₄²⁻

प्रश्न 4.

विद्युत आपूर्ति में लघुपथन (शॉर्ट सर्किट) और अतिभारण (ओवर लोड) से क्या तात्पर्य है?

अतिभारण: किसी विद्युत परिपथ में प्रयोग होने वाले तारों के लिए धारा का अधिकतम परिमाण निश्चित होता है। यदि परिपथ में उपयोग होने वाले उपकरणों की शक्ति इस सीमा से बढ़ जाती है तो इसे अतिभारण कहते हैं। इससे विद्युत तारों के ऊपर लगी विद्युत-रोधी परत गल सकती है और यह विद्युत झटके का कारण हो सकता है। इसके कारण उपकरण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

लघुपथन: तारों के ऊपर विद्युत रोधी पदार्थ कभी-कभी खराब या क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे विद्युतन्मय तथा उदासीन तार आपस में सम्पर्क में आ जाते हैं। ऐसी स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध शून्य हो जाता है और उसमें अत्यधिक धारा प्रवाहित होने लगती है। इसे लघुपथन कहते हैं।

परिपथ में लघुपथन के कारण चिनगारी भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे ज्वलनशील पदार्थों का संपर्क होने पर आग लग सकती है।

प्रश्न 5.

आयनिक यौगिकों के महत्त्वपूर्ण गुण वताइए।

1. आयनिक यौगिक ठोस एवं कठोर होते हैं।

2. आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक काफी उच्च होते हैं।

3. आयनिक यौगिक जल में घुलनशील तथा किरोसीन, पेट्रोल में अघुलनशील है।

4. आयनिक यौगिकों का जलीय विलयन विद्युत का सुचालक होता है।

प्रश्न 6.

विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर) का उपयोग जल के शुद्धिकरण में किया जाता है, क्यों?

विरंजक चूर्ण कीटाणुनाशक पदार्थ है, इसलिए इसका उपयोग जल के शुद्धिकरण करने में किया जाता है।

प्रश्न 7.

पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

पादप में प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह (तना) का प्रकाश की ओर मुड़ना ऑक्सीन हार्मोन के कारण होता है।

प्रश्न 8.

ओजोन क्या है? यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?

ओजोन ऑक्सीजन का एक समस्थानिक है जिसका अणुसूत्र O₃ होता है। सूर्य किरण (ओजोन) ओजोन घातक पराबैंगनी विकिरणों को सोख लेता है, पृथ्वी तक आने नहीं देता है। इस प्रकार ओजोन पारितंत्र के लिए सुरक्षा छतरी का कार्य करता है।

O₂ → O + O

O₂ + O → O₃

खण्ड‑C: लघु उत्तरीय प्रश्न (9–16)

प्रश्न 9.

5 cm लंबा कोई बिम्ब 10 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति एवं साइज ज्ञात कीजिए।

h₁ = 5 cm, f = -10 cm, u = -25 cm

दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f → 1/v - 1/25 = -1/10 → 1/v = -3/50 → v = -50/3 ≈ -16.67 cm

आवर्धन: h₂/h₁ = -v/u → h₂ ≈ -3.3 cm

प्रकृति: प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और छोटा बनता है।

प्रश्न 10.

तारे टिमटिमाते क्यों हैं?

हमारा वायुमंडल वायु की सघन तथा विरल परतों से मिलकर बना है। पृथ्वी के समीप वायु सघन होती है तथा ऊपर विरल होती जाती है। तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन में परिवर्तन के कारण होता है। तारे से आने वाली प्रकाश किरण जब विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है तो अभिलम्ब की ओर मुड़ती है। अतः तारे की आभासी स्थिति वास्तविक स्थिति से थोड़ी ऊपर होती है। यह स्थिति वायु के घनत्व में बदलाव के कारण बदलती रहती है, इसलिए तारे टिमटिमाते नजर आते हैं।

प्रश्न 11.

उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें उष्मा, प्रकाश एवं विद्युत के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।

(i) उष्मा के रूप में: CaCO₃ → CaO + CO₂

(ii) प्रकाश के रूप में: 2AgCl → 2Ag + Cl₂

(iii) विद्युत के रूप में: 2H₂O → 2H₂ + O₂

प्रश्न 12.

एक बेकर ने पाया कि उसके द्वारा बनाया गया केक कठोर और आकार में छोटा है। वह कौन सा संघटक डालना भूल गया है, जिससे केक फूला हुआ बन सकता था? कारण बताएँ।

संघटक: बेकिंग पाउडर

बेकिंग पाउडर बेकिंग सोडा एवं एक मंद खाद्य अम्ल का मिश्रण है। गर्म करने पर यह अम्ल से अभिक्रिया कर CO₂ गैस प्रदान करता है। CO₂ के कारण ही केक फूलता है और हल्का हो जाता है।

प्रश्न 13.

निम्नलिखित समीकरणों के लिए संतुलित समीकरण लिखें:

(i) H₂ + Cl₂ → 2HCl

(ii) 2H₂S + 3O₂ → 2H₂O + 2SO₂

(iii) MnO₂ + 4HCl → MnCl₂ + 2H₂O + Cl₂

प्रश्न 14.

डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?

डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना जनन की मूल प्रक्रिया है। डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनने से दो प्रतिकृतियाँ बनती हैं और दो कोशिकाएँ बनती हैं। इसलिए कोशिका की उत्पत्ति के लिए डी.एन.ए. की प्रतिकृति आवश्यक है।

प्रश्न 15.

जीन लक्षणों को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं?

जीन में किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है। प्रोटीन के संश्लेषण से नई कोशिकाएँ और शरीर का निर्माण होता है।

अगर संतति के जीन में लंबी आकृति, काले बाल या काले आँखों की सूचना है, तो हार्मोन उसी अनुसार प्रोटीन बनाएंगे। संतति लंबी और काले बाल/आँख वाली होगी।

अगर जीन में बौनेपन, भूरी आँख और बाल की सूचना है, तो संतति बौना और भूरी आँख/बाल वाली होगी।

खण्ड‑D: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (46–52)

खण्ड‑D: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (46–52)

प्रश्न 16.

परितंत्र से क्या अभिप्राय है? इसके प्रमुख घटकों के नाम तथा उदाहरण बताएँ।

किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में उपस्थित जैव और अजैव कारक मिलकर परितंत्र का निर्माण करते हैं।

एक परितंत्र में सभी सजीव परस्पर अन्योन्य क्रिया करते हैं और अजैव कारकों से प्रभावित होते हैं।

प्रमुख घटक:

  • जैव घटक: उदाहरण – सूक्ष्मजीव, जन्तु, पौधे आदि।
  • अजैव घटक: उदाहरण – ताप, वर्षा, वायु, मृदा, खनिज आदि।

प्रश्न 17.

प्रतिरोध किसे कहते हैं? प्रतिरोध का S.I. मात्रक लिखिए। किसी चालक का प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है, वर्णन कीजिए।

प्रतिरोध: वह कारक जो चालक तार में प्रवाहित धारा का विरोध करता है।

S.I. मात्रक: ओम (Ω)

चालक का प्रतिरोध इस बातों पर निर्भर करता है:

  • चालक की लंबाई: लंबाई बढ़ने से प्रतिरोध बढ़ता है।
  • चालक की मोटाई: मोटाई बढ़ने से प्रतिरोध घटता है; मोटाई घटने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
  • चालक की प्रकृति: अलग-अलग पदार्थ का प्रतिरोध अलग होता है।
  • तापमान: ताप बढ़ने से प्रतिरोध बढ़ता है।

अपवाद: जर्मन सिल्वर, मैगनीन इत्यादि।

प्रश्न 18.

(1) विद्युत चुम्बक क्या है? एक परिनालिका चुम्बक की भाँति कैसे व्यवहार करती है?
(2) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम लिखें।

(1) विद्युत चुम्बक: यह एक युक्ति है जो विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव पर कार्य करती है। इसमें लोहे के क्रोड पर तांबे की कुंडली होती है। धारा प्रवाहित रहने पर यह चुंबक की तरह व्यवहार करता है।

परिनालिका चुम्बक का व्यवहार: परिनालिका का एक सिरा उत्तर ध्रुव और दूसरा दक्षिण ध्रुव जैसा होता है। इससे उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ किसी छड़ चुंबक की तरह समान रहती हैं।

(2) फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम:

  • यदि बाएँ हाथ के अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा को लम्बवत फैलाया जाए:
  • मध्यमा: धारा की दिशा
  • तर्जनी: चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
  • अंगूठा: बल की दिशा

प्रश्न 19.

ताँबा के एक अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखिए। ताँबा धातु के निष्कर्षण का समीकरण लिखिए। किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप एनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे।

अयस्क का नाम: कॉपर ग्लांस

निष्कर्षण का समीकरण:

  • 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂
  • 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂

विद्युत अपघटनी:

  • एनोड: अशुद्ध M का मोटा टुकड़ा
  • कैथोड: शुद्ध M का पतला टुकड़ा
  • विद्युत अपघट्य: जल में घुलनशील M का लवण

प्रश्न 20.

निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए संतुलित समीकरण लिखिए:

  • (a) C₂H₅OH + 3O₂ → 2CO₂ + 3H₂O
  • (b) CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl
  • (c) 2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂
  • (d) CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
  • (e) CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O

प्रश्न 21.

(a) पोषण की परिभाषा दें।
(b) अमीबा भोजन किस प्रकार प्राप्त करता है? उस विधि को क्या कहते हैं?

(a) पोषण: यह जैविक प्रक्रिया है जिसमें जीवधारी पोषक ग्रहण करके ऊर्जा प्राप्त करते हैं और नया जीवद्रव्य बनाते हैं।

(b) अमीबा का पोषण: अमीबा प्राणीसमभोजी (फैगोसाइटोसिस) विधि से भोजन ग्रहण करता है।

प्रक्रिया:

  • कूट-पाद (pseudopodia) भोजन को चारों ओर घेरते हैं।
  • भोजन खाद्य-रिक्तिका में बंद हो जाता है।
  • पाचक एंजाइम उसे पचाते हैं।

प्रश्न:

उपार्जित लक्षण से आप क्या समझते हैं? क्या उपार्जित लक्षणों की वंशागति होती है?

उपार्जित लक्षण: वे लक्षण जिन्हें जीव अपने जीवनकाल में अर्जित करता है।

  • ये लक्षण पर्यावरण के प्रभाव से उत्पन्न होते हैं।
  • वंशानुगत नहीं होते: उपार्जित लक्षण डी.एन.ए. में परिवर्तन नहीं करते।
  • उदाहरण: चूहों की पूँछ काटने पर भी अगली पीढ़ी बिना पूँछ के पैदा नहीं होगी।

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