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इतिहास और सामाजिक विज्ञान नोट्स

इतिहास और सामाजिक विज्ञान - महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1: उन्नीसवीं सदी में भारत में गरीब जनता पर मुद्रण संस्कृति का क्या असर हुआ?

  • सस्ती किताबें: मुद्रण क्रांति से किताबें सस्ती हो गईं। गरीब लोग भी पढ़ सके। कई लोगों को छापाखानों में काम मिला।
  • समाचार तक पहुँच: अखबार और सस्ते प्रिंट से लोगों तक देश और दुनिया की खबरें पहुँचने लगीं।
  • राष्ट्रवाद की भावना: मुद्रण ने गरीबों में देश के प्रति प्यार और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई।
  • सामाजिक जागरूकता: मुद्रण से लोग शराबखोरी, अशिक्षा और गलत प्रथाओं जैसे सती, बाल विवाह, मूर्तिपूजा और जातिवाद के खिलाफ जागरूक हुए।
  • न्यायपूर्ण समाज: किताबों में पुराने पाखंडों की आलोचना हुई और नए, न्यायपूर्ण समाज की सीख दी गई।
निष्कर्ष: मुद्रण संस्कृति ने गरीब जनता की सोच बदल दी और उन्हें शिक्षित और जागरूक बनाया।

प्रश्न 2: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रमुख उद्देश्यों को लिखें।

  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना: WTO का उद्देश्य देशों के बीच व्यापार आसान और खुला बनाना है।
  • नियम बनाना और पालन करवाना: संगठन व्यापार से जुड़े नियम बनाता है और देखता है कि सभी देश उनका पालन करें।
  • समान और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना: व्यापार में सभी देशों के लिए समान अवसर हों, कोई भेदभाव न हो और व्यापार पारदर्शी हो।

प्रश्न 3: महामंदी के कारणों की व्याख्या कीजिए।

  • कृषि में अति उत्पादन: फसलें ज्यादा होने के कारण कीमतें गिर गईं और किसानों की आय कम हो गई। बिक्री नहीं होने से फसल बर्बाद होने लगी।
  • अमेरिका से कर्ज और पूंजी की वापसी: कई देशों ने अमेरिका से कर्ज लिया था। संकट आते ही अमेरिका ने अपनी पूंजी वापस ले ली।
  • शेयर बाजार का गिरना: अमेरिका के शेयर बाजार में शेयरों की कीमतें गिर गईं और लाखों निवेशक दिवालिये हो गए।
  • अंतरराष्ट्रीय संकट: अमेरिका की पूंजी पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। यूरोप के कई बैंक और देश संकट में पड़ गए।
निष्कर्ष: अति उत्पादन और अमेरिकी निवेश की कमी की वजह से पूरी दुनिया में आर्थिक संकट और महामंदी फैल गई।

प्रश्न 4: पूना समझौता (पैक्ट) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

  • डॉ. अंबेदकर चाहते थे कि दलित अपने नेता खुद चुन सकें। इसके लिए उन्होंने अलग चुनाव व्यवस्था की माँग की।
  • गांधी जी इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि इससे समाज बँट जाएगा।
  • सरकार ने अंबेदकर की बात मान ली। गांधी जी ने विरोध में अनशन शुरू किया।
  • देश के नेताओं के समझाने पर गांधी जी और अंबेदकर में 1932 में समझौता हुआ। इसे पूना समझौता कहा जाता है।
  • दलितों को विधान सभाओं में सीटों का आरक्षण दिया गया।
  • लेकिन अलग चुनाव क्षेत्र नहीं बनाए गए। वे सामान्य चुनाव में वोट देंगे।
निष्कर्ष: पूना समझौते ने दलितों को आरक्षण दिया और समाज में संतुलन बनाए रखा।

प्रश्न 5: रॉलेट एक्ट क्या था? भारत के लोग इसके विरोध में क्यों थे? गांधी जी ने इसका विरोध कैसे किया?

  • रॉलेट एक्ट क्या था: 1919 में ब्रिटिश सरकार ने कानून बनाया। इसके तहत किसी को बिना मुकदमा चलाए 2 साल तक जेल में रखा जा सकता था। उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन को दबाना था।
  • लोग क्यों विरोधी थे: यह कानून अन्यायपूर्ण था। पहले विश्व युद्ध में मदद करने के बावजूद ऐसा कानून बनाया गया। लोगों को लगा कि सरकार आंदोलन दबाना चाहती है।
  • गांधी जी ने विरोध कैसे किया:
    • अहिंसक विरोध और नागरिक अवज्ञा शुरू की।
    • लोग हड़ताल, रैलियाँ और जुलूस करने लगे।
    • रेलवे, दुकानें और टेलीग्राफ बंद हो गए।
    • अमृतसर में शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने गोली चला दी।
    • लोगों ने बैंक, डाकखाने और रेलवे स्टेशन बंद कर दिए।
    • अंग्रेजों ने पूरे इलाके में मार्शल लॉ लगा दिया।
आसान याद रखने का तरीका:
रॉलेट एक्ट = बिना मुकदमा जेल में रखना | गांधी जी = अहिंसक विरोध | लोग = हड़ताल और रैलियाँ

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