10th

फ्रांस में राष्ट्रवाद का विकास

फ्रांसीसी लोगों में सामूहिक पहचान का भाव कैसे पैदा किया गया?

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने लोगों को यह समझाया कि वे सभी एक ही देश और एक ही राष्ट्र के सदस्य हैं। इसके लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

1. पितृभूमि और नागरिक का भाव
लोगों को बताया गया कि फ्रांस उनकी पितृभूमि है। देश में रहने वाला हर व्यक्ति उसका नागरिक है। इससे लोगों में एक समान पहचान बनी।
2. समान अधिकार
एक संविधान बनाया गया। सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए। अब कोई ऊँच-नीच नहीं रही।
3. नया राष्ट्रीय झंडा
राजा का झंडा हटाकर तिरंगा झंडा अपनाया गया। यह पूरे देश की नई पहचान बना।
4. जनता की सभा
इस्टेट जनरल का नाम बदलकर नेशनल एसेम्बली रखा गया। इसके सदस्य जनता द्वारा चुने जाने लगे।
5. राष्ट्रीय भावना का विकास
देशभक्ति गीत रचे गए। लोगों से राष्ट्र के लिए शपथ दिलाई गई। शहीदों को सम्मान दिया गया।
6. एक जैसे कानून
पूरे फ्रांस में समान कानून लागू किए गए। सभी नागरिकों पर एक ही नियम लागू हुए।
7. कर और माप-तौल में समानता
देश के अंदर लगने वाले कर हटा दिए गए। माप-तौल की एक समान प्रणाली अपनाई गई।
8. एक राष्ट्रीय भाषा
अलग-अलग बोलियों की जगह फ्रेंच भाषा को पूरे देश की भाषा बनाया गया।
निष्कर्ष : इन सभी कदमों से फ्रांसीसी लोगों में एकता की भावना बढ़ी और वे स्वयं को एक राष्ट्र के नागरिक मानने लगे।
पहला विश्वयुद्ध और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

पहले विश्वयुद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

पहले विश्वयुद्ध (1914–1918) के कारण भारत के लोगों को भारी कष्ट झेलने पड़े। इससे अंग्रेजी सरकार के प्रति असंतोष बढ़ा और राष्ट्रीय आंदोलन को बल मिला।

1. करों में वृद्धि और महँगाई
युद्ध का खर्च निकालने के लिए सरकार ने कर बढ़ा दिए। रोज़मर्रा की चीज़ें महँगी हो गईं। गरीब लोगों का जीवन कठिन हो गया।
2. जबरन सैनिक भर्ती
कई भारतीयों को जबरदस्ती सेना में भर्ती किया गया। गाँवों से युवकों को युद्ध में भेजा गया। इससे लोगों में डर और नाराज़गी फैल गई।
3. अकाल और महामारी
कई क्षेत्रों में फसलें खराब हो गईं। खाने की कमी से अकाल पड़ा। इसी समय फ्लू जैसी महामारी फैली, जिससे बहुत लोग मारे गए।
4. सरकार की उदासीनता
सरकार ने जनता की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया। न पर्याप्त मदद की गई, न राहत पहुँचाई गई। इससे जनता सरकार से बहुत नाराज़ हो गई।
निष्कर्ष : इन सभी कारणों से अंग्रेज सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ा और लोगों ने राष्ट्रीय आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेना शुरू किया।
कॉर्न लॉ – प्रश्नोत्तर

कॉर्न लॉ क्या था? इसे क्यों हटाया गया? इसके क्या परिणाम हुए?

कॉर्न लॉ क्या था?

18वीं सदी में ब्रिटेन की जनसंख्या तेजी से बढ़ी। इससे खाने के अनाज की माँग बढ़ गई।

ब्रिटेन के बड़े ज़मींदार नहीं चाहते थे कि बाहर से अनाज आए। वे अपना अनाज महँगे दाम पर बेचना चाहते थे।

उनके दबाव में सरकार ने विदेश से अनाज मँगाने पर रोक लगा दी। इसी कानून को कॉर्न लॉ कहा गया।

कॉर्न लॉ क्यों हटाया गया?

कॉर्न लॉ के कारण देश में अनाज की कमी हो गई। अनाज बहुत महँगा हो गया।

गरीब लोगों को भोजन मिलना कठिन हो गया। मज़दूर और उद्योगपति दोनों परेशान हो गए।

जनता के भारी विरोध के कारण सरकार को यह कानून हटाना पड़ा।

कॉर्न लॉ के परिणाम

विदेशों से सस्ता अनाज आने लगा।
अनाज की कीमतें कम हो गईं।
आम लोगों को राहत मिली।
उद्योगों को भी लाभ हुआ।
निष्कर्ष : कॉर्न लॉ जनता के लिए हानिकारक था, इसलिए इसे समाप्त कर दिया गया।
मनरेगा 2005 – उद्देश्य

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 के उद्देश्य लिखिए।

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 को गाँव के लोगों को काम देने के लिए बनाया गया है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

1. काम का अधिकार
इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण लोगों को काम पाने का अधिकार देना है। इससे बेरोजगारी कम होती है।
2. 100 दिन का काम
हर ग्रामीण परिवार के एक सदस्य को साल में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है।
3. गाँव से शहर पलायन रोकना
गाँव में ही काम मिलने से लोगों को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता।
4. गरीब लोगों की मदद
काम मिलने से गरीब लोगों की आय बढ़ती है। इससे उनका जीवन स्तर बेहतर होता है।
5. बेरोजगारी भत्ता
यदि सरकार समय पर काम नहीं दे पाती है, तो लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है।
6. गाँव का विकास
इस योजना से सड़क, तालाब, नहर जैसे कार्य होते हैं। इससे गाँवों का विकास होता है।
निष्कर्ष : इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण लोगों को रोजगार देना, गरीबी कम करना और गाँवों का समग्र विकास करना है।
ईस्ट इंडिया कंपनी और भारतीय बुनकर

ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय बुनकरों से नियमित कपड़ा आपूर्ति के लिए क्या किया?

उत्तर :
ईस्ट इंडिया कंपनी चाहती थी कि भारतीय बुनकर हमेशा उसी के लिए सूती और रेशमी कपड़े बनाएँ। इसके लिए कंपनी ने निम्नलिखित तरीके अपनाए—

1. पहले से पैसा देना

कंपनी बुनकरों को कपड़ा बनाने से पहले ही पैसा दे देती थी।
इसे कर्ज कहा जाता था।
कर्ज लेने के बाद बुनकर कंपनी के लिए ही काम करने को मजबूर हो जाते थे।

2. अपने कर्मचारी रखना

कंपनी ने अपने कर्मचारी रखे जिन्हें गुमाश्ता कहा जाता था।
ये कर्मचारी बुनकरों के काम पर नज़र रखते थे।

3. दूसरे व्यापारियों से रोक

गुमाश्ता यह सुनिश्चित करता था कि बुनकर किसी अन्य व्यापारी के लिए काम न करें।
बुनकर केवल ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए ही कपड़ा बनाते थे।

4. कपड़ा सिर्फ कंपनी को बेचना

जिन बुनकरों ने कर्ज लिया होता था, वे अपना बनाया कपड़ा केवल कंपनी को ही बेच सकते थे।
उन्हें किसी और को कपड़ा बेचने की अनुमति नहीं थी।

5. कम दाम और सख्ती

कंपनी बुनकरों को बहुत कम दाम देती थी।
बुनकर मोल-भाव नहीं कर सकते थे।
गुमाश्ते उनके साथ सख्ती से पेश आते थे।

निष्कर्ष :
इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी ने कर्ज, दबाव और सख्ती के माध्यम से भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की।
लोकतांत्रिक सरकार की विशेषताएँ

लोकतांत्रिक सरकार की विशेषताएँ लिखें।

उत्तर :
लोकतांत्रिक सरकार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. जनता की सरकार

लोकतंत्र में सरकार जनता की इच्छा से चलती है।
लोग अपने प्रतिनिधि खुद चुनते हैं।
सरकार जनता की राय को महत्व देती है।

2. उत्तरदायी और जिम्मेदार सरकार

लोकतंत्र में सरकार को जनता चुनती है।
इसलिए सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है।
अगर सरकार अच्छा काम नहीं करती, तो जनता उसे हटा सकती है।

3. समानता और स्वतंत्रता

लोकतंत्र में सभी नागरिक समान होते हैं।
किसी के साथ जाति, धर्म, रंग या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
सभी को बोलने, लिखने और सभा करने की आज़ादी होती है।

4. व्यक्ति की गरिमा का सम्मान

लोकतंत्र में हर व्यक्ति को सम्मान मिलता है।
किसी को छोटा या बड़ा नहीं माना जाता।
हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का अधिकार होता है।

5. विविधता में एकता

लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों का सम्मान किया जाता है।
निर्णय सोच-समझकर और बातचीत से लिए जाते हैं।
इससे झगड़े कम होते हैं और गलतियों को सुधारा जा सकता है।

👉 आसान निष्कर्ष :
लोकतांत्रिक सरकार जनता की सरकार होती है,
जो समानता, स्वतंत्रता और सम्मान पर आधारित होती है।
असहयोग आंदोलन असफल क्यों हुआ?

असहयोग आंदोलन असफल क्यों हुआ?

उत्तर :
असहयोग आंदोलन असफल होने के मुख्य कारण इस प्रकार थे—

1. सही नेतृत्व की कमी

असहयोग आंदोलन गाँधी जी ने शुरू किया था।
आंदोलन पूरे देश में फैल गया।
लेकिन कई जगह अच्छे नेताओं की कमी थी।
इस कारण लोग सही तरीके से आंदोलन नहीं चला पाए।

2. गरीब लोगों की समस्या

लोगों से विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने को कहा गया।
खादी पहनने की सलाह दी गई।
लेकिन खादी बहुत महँगी थी।
गरीब लोग इसे नहीं खरीद सके।
इससे लोगों का उत्साह कम हो गया।

3. वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी

स्कूल, कॉलेज और अदालतों का बहिष्कार किया गया।
लेकिन उनकी जगह भारतीय संस्थान नहीं बने।
इस कारण विद्यार्थी फिर स्कूल चले गए।
वकील भी दोबारा अदालतों में काम करने लगे।

4. हिंसा का फैल जाना

यह आंदोलन अहिंसक था।
लेकिन बाद में कुछ जगह हिंसा होने लगी।
5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा में भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी।
इस घटना में पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।

5. आंदोलन वापस लेना

गाँधी जी हिंसा के खिलाफ थे।
चौरी-चौरा की घटना से वे दुखी हो गए।
इसलिए उन्होंने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।

निष्कर्ष :
इन सभी कारणों से असहयोग आंदोलन अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर सका और अंततः असफल हो गया।
मुद्रण संस्कृति और राष्ट्रवाद

मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में कैसे मदद की?

मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने लोगों को जागरूक बनाया और उन्हें अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध सोचने के लिए प्रेरित किया।

1. अखबारों की भूमिका
अखबारों और पत्रिकाओं ने अंग्रेज़ सरकार की गलत नीतियों और अत्याचारों को उजागर किया। इससे लोगों में देशप्रेम की भावना बढ़ी।
2. कहानियाँ और कविताएँ
कहानियों और कविताओं के माध्यम से देशभक्ति की भावना फैलायी गई। ‘आनंद मठ’ जैसी पुस्तकों ने लोगों को देश के लिए बलिदान देने की प्रेरणा दी।
3. राष्ट्रवादी विचारों का प्रचार
राष्ट्रवादी अखबारों ने स्वतंत्रता से जुड़े विचार आम जनता तक पहुँचाए। इससे आज़ादी पाने की इच्छा मजबूत हुई।
4. कार्टून और चित्र
कार्टूनों और चित्रों के द्वारा अंग्रेज़ी शासन की बुराइयों को सरल भाषा में दिखाया गया। इससे लोग शासन के खिलाफ सोचने लगे।
5. लोगों में जागरूकता
मुद्रण संस्कृति से लोग पढ़ना-लिखना सीखने लगे। वे नेताओं और समाज सुधारकों के विचार समझने लगे। इससे राष्ट्रवाद और मजबूत हुआ।
✔ आसान शब्दों में निष्कर्ष :
मुद्रण संस्कृति ने लोगों को जागरूक बनाया और उनमें देशभक्ति की भावना पैदा की। इसी कारण भारत में राष्ट्रवाद का विकास हुआ।
भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य

भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल क्यों है?

भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है क्योंकि भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है और यहाँ पूरे वर्ष पर्याप्त धूप मिलती है। इससे सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएँ हैं।

1. सूर्य का प्रकाश मुफ्त है
सूर्य का प्रकाश प्रकृति का मुफ्त उपहार है। इसके द्वारा बिना किसी ईंधन के बिजली बनाई जा सकती है।
2. खाली और बंजर ज़मीन का उपयोग
भारत में बहुत-सी बंजर और खाली ज़मीन उपलब्ध है। इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा रहे हैं।
3. सोलर पार्कों का विकास
देश में कई बड़े सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनसे बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन हो रहा है।
4. विदेशी मुद्रा की बचत
सौर ऊर्जा के उपयोग से तेल और गैस के आयात में कमी आती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
5. नवीकरणीय और प्रदूषण रहित ऊर्जा
सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय स्रोत है, जो कभी समाप्त नहीं होता। इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता।
6. ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग
गाँवों में सौर ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इससे खाना पकाने, पानी निकालने, पानी गर्म करने और घरों व सड़कों पर रोशनी में मदद मिलती है।
निष्कर्ष : इन सभी कारणों से भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और भविष्य में एक प्रमुख सौर ऊर्जा उत्पादक देश बन सकता है।
श्रीलंका में सत्ता की साझेदारी और जातीय तनाव

श्रीलंका में सत्ता की साझेदारी की व्यवस्था के बारे में चर्चा करें। अथवा श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदाय के बीच तनाव के कारण लिखिए।

श्रीलंका में सिंहली समुदाय बहुसंख्यक है, जबकि तमिल समुदाय अल्पसंख्यक है। स्वतंत्रता के बाद सत्ता पर सिंहली समुदाय का अधिक नियंत्रण हो गया। इस कारण सत्ता की उचित साझेदारी नहीं हो सकी और दोनों समुदायों के बीच तनाव बढ़ गया।

1. सिंहली भाषा को प्राथमिकता
सरकार ने सिंहली भाषा को देश की एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया। तमिल भाषा को उचित महत्व नहीं दिया गया।
2. शिक्षा में भेदभाव
विश्वविद्यालयों में प्रवेश के समय सिंहली छात्रों को अधिक अवसर दिए गए। तमिल छात्रों के साथ भेदभाव हुआ।
3. सरकारी नौकरियों में असमानता
सरकारी नौकरियों में सिंहली समुदाय को प्राथमिकता दी गई। तमिल लोग पीछे रह गए।
4. बौद्ध धर्म को सरकारी संरक्षण
सरकार ने बौद्ध धर्म को विशेष संरक्षण दिया। इससे तमिल समुदाय में असंतोष बढ़ा।
5. सत्ता में भागीदारी की कमी
तमिल समुदाय को सरकार और प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
निष्कर्ष : इन सभी कारणों से तमिल समुदाय में असंतोष फैला और सिंहली तथा तमिल समुदाय के बीच तनाव बढ़ गया।
वैश्वीकरण का असमान प्रभाव

“वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।

वैश्वीकरण का असर समाज के सभी लोगों और क्षेत्रों पर एक जैसा नहीं पड़ा है। कुछ वर्गों को इससे अधिक लाभ मिला है, जबकि कुछ वर्गों को नुकसान भी हुआ है। इसी कारण कहा जाता है कि वैश्वीकरण का प्रभाव समान नहीं है।

1. शहर और गाँव पर अलग प्रभाव
वैश्वीकरण से शहरों के अमीर लोगों को अधिक लाभ हुआ है। उन्हें नई और बेहतर सुविधाएँ मिली हैं। लेकिन गाँवों और गरीब लोगों को इसका कम लाभ मिला है।
2. बड़ी कंपनियों को लाभ
कुछ भारतीय कंपनियाँ बहुत बड़ी बन गईं। कई कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गईं। आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में रोजगार के अच्छे अवसर मिले।
3. किसानों और छोटे उद्योगों को नुकसान
किसान और छोटे व्यापारी विदेशी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाए। इससे उनकी आय घट गई। कई स्थानों पर गरीबी और बेरोजगारी बढ़ी।
4. अमीरों के लिए वस्तुएँ
वैश्वीकरण से मोबाइल, कार, टीवी, फ्रिज और जंक फूड जैसी वस्तुएँ बढ़ीं। ये वस्तुएँ अधिकतर अमीर वर्ग के लिए ही उपयोगी हैं।
5. छोटे दुकानदारों पर प्रभाव
विदेशी कंपनियों के आने से छोटी दुकानों का व्यापार कम हो गया। कई छोटे दुकानदारों का रोजगार खतरे में पड़ गया।
निष्कर्ष : वैश्वीकरण से कुछ वर्गों को लाभ हुआ है और कुछ वर्गों को नुकसान। इसलिए इसका प्रभाव सभी पर समान नहीं है।
वैश्वीकरण का प्रभाव

“वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।

वैश्वीकरण का प्रभाव समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों पर समान नहीं पड़ा है। कुछ लोगों को इससे अधिक लाभ मिला है, जबकि कुछ लोगों को नुकसान भी हुआ है। इसी कारण कहा जाता है कि वैश्वीकरण का प्रभाव एक जैसा नहीं है।

1. शहर और गाँव पर अलग प्रभाव
वैश्वीकरण से शहरों के अमीर लोगों को अधिक लाभ हुआ है। उन्हें नई सुविधाएँ और अवसर मिले हैं। लेकिन गाँवों और गरीब लोगों को इसका कम लाभ मिला है।
2. बड़ी कंपनियों को लाभ
कुछ भारतीय कंपनियाँ बहुत बड़ी बन गईं। कई कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बनीं। आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े।
3. किसानों और छोटे उद्योगों को नुकसान
किसान और छोटे उद्योग विदेशी कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाए। इससे उनकी आय घटी। कई जगह गरीबी और बेरोजगारी बढ़ी।
4. अमीरों के लिए वस्तुएँ
वैश्वीकरण से मोबाइल, कार, टीवी, फ्रिज और जंक फूड जैसी वस्तुएँ बढ़ीं। ये वस्तुएँ अधिकतर अमीर वर्ग के लिए हैं।
5. छोटे दुकानदारों पर असर
विदेशी कंपनियों के आने से छोटी दुकानों का व्यापार कम हो गया। कई छोटे दुकानदारों का रोजगार खतरे में पड़ गया।
निष्कर्ष : वैश्वीकरण से कुछ वर्गों को लाभ हुआ है और कुछ वर्गों को नुकसान। इसलिए इसका प्रभाव सभी पर समान नहीं है।
भूमि क्षरण (भूमि निम्नीकरण)

भूमि क्षरण (भूमि निम्नीकरण) क्या है? इसके कारण लिखिए।

जब मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और भूमि खेती के योग्य नहीं रह जाती, तो इस स्थिति को भूमि क्षरण या भूमि निम्नीकरण कहते हैं।

भूमि क्षरण के कारण

1. भूमि अपरदन
तेज हवा और पानी मिट्टी की ऊपरी परत को बहा ले जाते हैं। इससे मिट्टी कमजोर हो जाती है।
2. भूमि प्रदूषण
कारखानों का गंदा पानी और कूड़ा-करकट भूमि को खराब कर देता है। ऐसी भूमि बेकार हो जाती है।
3. गलत खेती
एक ही खेत में बार-बार फसल उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं। इससे भूमि कमजोर हो जाती है।
4. वनों की कटाई और अति-चराई
पेड़ों की कटाई से मिट्टी खुली रह जाती है। जानवरों की अधिक चराई से भी मिट्टी खराब हो जाती है।
5. उद्योग-धंधे
सीमेंट और खनन उद्योगों से धूल खेतों पर जम जाती है। इससे मिट्टी की उपज कम हो जाती है।
निष्कर्ष : भूमि क्षरण से खेती और पर्यावरण दोनों को नुकसान होता है। इसलिए भूमि को बचाना बहुत आवश्यक है।
फ्रांस में राष्ट्रवाद का विकास

फ्रांसीसी लोगों में सामूहिक पहचान का भाव कैसे पैदा किया गया? या फ्रांस में राष्ट्रवाद का विकास कैसे हुआ?

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने लोगों को यह समझाया कि वे सभी एक ही देश और एक ही राष्ट्र के सदस्य हैं। इसके लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

1. पितृभूमि और नागरिक का भाव
लोगों को बताया गया कि फ्रांस उनकी पितृभूमि है। देश में रहने वाला हर व्यक्ति उसका नागरिक है। इससे लोगों में एक समान पहचान बनी।
2. समान अधिकार
एक संविधान बनाया गया। सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए। अब कोई ऊँच-नीच नहीं रही।
3. नया राष्ट्रीय झंडा
राजा का झंडा हटाकर तिरंगा झंडा अपनाया गया। यह पूरे देश की नई पहचान बना।
4. जनता की सभा
इस्टेट जनरल का नाम बदलकर नेशनल एसेम्बली रखा गया। इसके सदस्य जनता द्वारा चुने जाने लगे।
5. राष्ट्रीय भावना का विकास
देशभक्ति गीत रचे गए। लोगों से राष्ट्र के लिए शपथ दिलाई गई। शहीदों को सम्मान दिया गया।
6. एक जैसे कानून
पूरे फ्रांस में समान कानून लागू किए गए। सभी नागरिकों पर एक ही नियम लागू हुए।
7. कर और माप-तौल में समानता
देश के अंदर लगने वाले कर हटा दिए गए। माप-तौल की एक समान प्रणाली अपनाई गई।
8. एक राष्ट्रीय भाषा
अलग-अलग बोलियों की जगह फ्रेंच भाषा को पूरे देश की भाषा बनाया गया।
निष्कर्ष : इन सभी कदमों से फ्रांसीसी लोगों में एकता की भावना बढ़ी और वे स्वयं को एक राष्ट्र के नागरिक मानने लगे।
पहला विश्वयुद्ध और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

पहले विश्वयुद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

पहले विश्वयुद्ध (1914–1918) के कारण भारत के लोगों को भारी कष्ट झेलने पड़े। इससे अंग्रेजी सरकार के प्रति असंतोष बढ़ा और राष्ट्रीय आंदोलन को बल मिला।

1. करों में वृद्धि और महँगाई
युद्ध का खर्च निकालने के लिए सरकार ने कर बढ़ा दिए। रोज़मर्रा की चीज़ें महँगी हो गईं। गरीब लोगों का जीवन कठिन हो गया।
2. जबरन सैनिक भर्ती
कई भारतीयों को जबरदस्ती सेना में भर्ती किया गया। गाँवों से युवकों को युद्ध में भेजा गया। इससे लोगों में डर और नाराज़गी फैल गई।
3. अकाल और महामारी
कई क्षेत्रों में फसलें खराब हो गईं। खाने की कमी से अकाल पड़ा। इसी समय फ्लू जैसी महामारी फैली, जिससे बहुत लोग मारे गए।
4. सरकार की उदासीनता
सरकार ने जनता की परेशानियों पर ध्यान नहीं दिया। न पर्याप्त मदद की गई, न राहत पहुँचाई गई। इससे जनता सरकार से बहुत नाराज़ हो गई।
निष्कर्ष : इन सभी कारणों से अंग्रेज सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ा और लोगों ने राष्ट्रीय आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेना शुरू किया।
कॉर्न लॉ – प्रश्नोत्तर

कॉर्न लॉ : क्या, क्यों और परिणाम

कॉर्न लॉ क्या था?

18वीं सदी में ब्रिटेन की जनसंख्या तेजी से बढ़ी। इससे खाने के अनाज की माँग बढ़ गई।

ब्रिटेन के बड़े ज़मींदार नहीं चाहते थे कि बाहर से अनाज आए। वे अपना अनाज महँगे दाम पर बेचना चाहते थे।

उनके दबाव में सरकार ने विदेश से अनाज मँगाने पर रोक लगा दी। इसी कानून को कॉर्न लॉ कहा गया।

कॉर्न लॉ क्यों हटाया गया?

कॉर्न लॉ के कारण देश में अनाज की कमी हो गई। अनाज बहुत महँगा हो गया।

गरीब लोगों को भोजन मिलना कठिन हो गया। मज़दूर और उद्योगपति दोनों परेशान हो गए।

जनता के भारी विरोध के कारण सरकार को यह कानून हटाना पड़ा।

कॉर्न लॉ के परिणाम

विदेशों से सस्ता अनाज आने लगा।
अनाज की कीमतें कम हो गईं।
आम लोगों को राहत मिली।
उद्योगों को भी लाभ हुआ।
निष्कर्ष : कॉर्न लॉ जनता के लिए हानिकारक था, इसलिए इसे समाप्त कर दिया गया।

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