राष्ट्रवाद और यूरोप का इतिहास
राष्ट्रवाद वह भावना है जिसमें लोग अपने आप को किसी राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं। लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी भाषा, संस्कृति, इतिहास और धर्म समान हैं। जब लोग इस समानता और सामूहिक पहचान को महसूस करते हैं और इसके लिए गर्व की भावना रखते हैं, तो इसे राष्ट्रवाद कहा जाता है।
राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति फ्रांस में 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हुई। इस क्रांति में राजतंत्र समाप्त हुआ और गणतंत्र की स्थापना हुई। इस क्रांति ने लोगों में अपनी राष्ट्रीय पहचान के प्रति जागरूकता और समानता की भावना पैदा की।
निरंकुशवाद एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें शासक वर्ग पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता। इस प्रकार का शासक अपनी मनमानी निर्णय ले सकता है और अपनी इच्छानुसार शासन चला सकता है। यह शासन केंद्रीकृत, दमनकारी और आम जनता के अधिकारों को नजरअंदाज करने वाला होता है।
फ्रेड्रिक सॉरयू एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी चित्रकार थे। 1848 ई. में उन्होंने चार चित्रों की श्रृंखला बनाई, जिनमें उन्होंने गणतंत्र, स्वतंत्रता, ज्ञानोदय और राष्ट्र के आदर्शों को चित्रित किया। उनके चित्रों ने लोगों में राष्ट्रीय भावना और लोकतांत्रिक विचारों को फैलाने में मदद की।
यूटोपिया का मतलब है एक आदर्श समाज, जहाँ कोई भेदभाव नहीं होता और सभी लोग समान अधिकारों के साथ रहते हैं। यूटोपिया को वास्तविक जीवन में पूरी तरह लागू करना कठिन है। इसके विचारक फ्रेड्रिक सॉरयू थे, जिन्होंने समानता और न्याय पर आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की।
जनमत संग्रह का अर्थ है किसी क्षेत्र के लोगों की राय को इकट्ठा करना। यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार है क्योंकि इसके द्वारा लोगों को अपने प्रतिनिधियों या सरकार के निर्णयों में प्रत्यक्ष भाग लेने का अधिकार मिलता है।
नृजातीय का मतलब है किसी समुदाय की साझा नस्ल, जनजातीय या सांस्कृतिक पहचान। इसमें भाषा, रीति-रिवाज, परंपराएँ और सामाजिक मूल्य शामिल होते हैं, जो लोगों को एक समूह के रूप में जोड़ते हैं।
- उन्होंने 'पितृभूमि' और 'नागरिक' जैसे विचार फैलाए, जिससे लोगों में समान अधिकारों की भावना बढ़ी।
- फ्रांस के लिए नया तिरंगा झंडा अपनाया।
- नेशनल एसेम्बली का गठन किया, जो सभी नागरिकों के प्रतिनिधियों से बनी।
- नई स्तुतियाँ, शपथ और शहीदों के गुणगान से राष्ट्रीय भावना को प्रबल किया।
- समान कानून और केंद्रीकृत प्रशासन लागू किया।
- पूरा देश में माप-तौल की समान प्रणाली लागू की।
- फ्रेंच भाषा को पूरे देश में प्रचलित किया।
- राजतंत्र समाप्त हुआ और गणतंत्र की स्थापना हुई।
- राष्ट्रवाद की भावना फैल गई और समानता की भावना विकसित हुई।
- धार्मिक स्वतंत्रता बढ़ी और पादरियों के अधिकार घटाए गए।
- राष्ट्रीय सभा की शक्ति बढ़ी और नए कानून इसी सभा द्वारा बनाये गए।
- सामंती अर्थतंत्र समाप्त हो गया और नई पूंजीवादी अर्थव्यवस्था आई।
- नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों की घोषणा हुई।
- फ्रांस की क्रांति ने पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद फैलाने में मदद की।
नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस के एक महान सेनानायक थे। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने कई युद्धों में विजय प्राप्त की। बाद में उन्हें फ्रांस का पहला सम्राट घोषित किया गया। उन्होंने अपने शासन में नेपोलियन संहिता लागू की।
- जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए।
- कानून के सामने सभी नागरिक समान और न्यायसंगत बने।
- सामंती व्यवस्था समाप्त हुई और किसानों को भू-दासत्व से मुक्ति मिली।
- प्रशासनिक सुधार किए और शहरों में संचार व यातायात सुगम बनाए।
- नेपोलियन की हार के बाद ऑस्ट्रिया में आयोजित।
- मुख्य देश: इंग्लैंड, रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया।
- फ्रांस में राजतंत्र की बहाली की गई।
- यूरोप में रूढ़िवादी व्यवस्था लागू की गई।
- पुराने राजतंत्रों को बहाल किया और सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया।
- जर्मन महासंघ और पोलैंड के हिस्सों का वितरण किया।
- सम्मेलन की मेज़बानी ड्यूक मेटरनिख ने की।
- प्रसिद्ध कथन: “जब फ्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।”
- कानून के सामने समानता।
- सभी नागरिकों के लिए मताधिकार।
- लोकतंत्र और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन।
- रूढ़िवाद: परंपराओं और पुराने नियमों को बनाए रखना।
- समन्वयवाद: अलग-अलग विचारों और मतों को मिलाकर संतुलित समाधान निकालना।
1830–1848 में यूरोप में कई देशों में निरंकुश और रूढ़िवादी शासन के खिलाफ विद्रोह हुए। फ्रांस, ब्रुसेल्स, इटली, जर्मनी, पोलैंड और आयरलैंड में जनता ने आंदोलन किया।
- मारीआन (फ्रांस): स्वतंत्रता, गणतंत्र और न्याय का प्रतीक।
- जर्मेनिया (जर्मनी): स्वतंत्रता, शक्ति, बहादुरी और राष्ट्रवाद का प्रतीक।
- भाषा लोगों को सांस्कृतिक रूप से समान होने की भावना देती है।
- लोकगीत, लोककविता और लोकनृत्य लोगों को अपने अतीत और संस्कृति से जोड़ते हैं।
- यह गर्व और एकता की भावना पैदा करता है, जिससे राष्ट्रवाद मजबूत होता है।
- ज्युसेपी मेत्सिनी इटली के महान क्रांतिकारी थे और निरंकुश शासन के विरोधी।
- उन्होंने 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' जैसे क्रांतिकारी संगठन बनाए।
- इटली कई छोटे राज्यों और हैब्सबर्ग साम्राज्य में बँटा हुआ था।
- काउंट कैमिलो दे कावूर ने कूटनीति और युद्ध के माध्यम से इटली का एकीकरण किया।
- जर्मनी के राज्यों को जोड़ने के लिए 'जॉलवेराइन' शुल्क संघ बनाया गया।
- 1848 में फ्रैंकफर्ट संसद ने संविधान का प्रारूप तैयार किया।
- 18 जनवरी 1871 को वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम को सम्राट घोषित किया गया।
- बिस्मार्क ने 'खून और खड्ग' नीति अपनाई।
- राष्ट्रवाद धीरे-धीरे और शांतिपूर्ण तरीके से विकसित हुआ।
- 1688 में आंग्ल संसद ने राजतंत्र की शक्ति सीमित की।
- 1707 में स्कॉटिश लोगों को ब्रिटेन में शामिल किया गया।
- 1801 में आयरलैंड को ब्रिटेन में शामिल किया गया।
- ऑटोमन साम्राज्य पश्चिम एशिया, बाल्कन क्षेत्र और उत्तरी अफ्रीका तक फैला।
- यूनानियों ने 1832 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
- बाल्कन क्षेत्र में जातीय भिन्नता और यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा के कारण तनाव बढ़ा।
- महिलाएँ राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाती थीं।
- राजनीतिक संगठन बनाए, विरोध सभाओं और जलूसों में भाग लिया।
- समाचार-पत्र शुरू किए और राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन किया।
- मताधिकार नहीं मिला।
- नारीवाद पुरुष और महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता का समर्थन करता है।
तुर्की शासन के अधीन आने वाला, पश्चिमी एशिया, बाल्कन क्षेत्र और उत्तरी अफ्रीका तक फैला साम्राज्य। राष्ट्रवाद के उदय के साथ, प्रथम विश्व युद्ध से पहले यह कई स्वतंत्र राष्ट्रों में विभाजित हो गया।
यूनान पर ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा था। 1832 में यूनान स्वतंत्र हुआ।
रोमानिया, बुल्गेरिया, यूनान, स्लोवेनिया, सर्विया आदि।
- भौगोलिक और जातीय भिन्नता – तुर्क लोग ईसाई जातियों का शोषण करते थे।
- राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार – ऑटोमन साम्राज्य के विघटन से स्थिति विस्फोटक हुई।
- आधुनिकीकरण में असफलता – सुधारों में असफलता से असंतोष बढ़ा।
- राज्यों में एकता का अभाव – हर राज्य अधिक क्षेत्र चाहता था।
- यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा – रूस, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया-हंगरी आदि ने तनाव बढ़ाया।
महिलाएँ आंदोलन में सक्रिय थीं। उन्होंने संगठन बनाए, सभाओं में भाग लिया, समाचार-पत्र शुरू किए और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया। 1848 में उन्हें केवल दर्शक दीर्घा में खड़े होने की अनुमति मिली।
नारीवाद वह दर्शन है जो स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता पर आधारित है।
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