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पृथक्करण और विलयन

पृथक्करण और विलयन के तरीके

क्रिस्टलीकरण (Crystallisation)

क्या है: क्रिस्टलीकरण एक तरीका है जिससे हम किसी मिश्रण में से शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल अलग कर सकते हैं और अशुद्धियाँ छोड़ दी जाती हैं।

कैसे करते हैं: सबसे पहले मिश्रण में मौजूद पदार्थ को पानी या किसी उपयुक्त द्रव में घोलते हैं। इस घोल को गरम करके पूरी तरह घुला लेते हैं। फिर इसे ठंडा होने देते हैं या रात भर छोड़ देते हैं। धीरे-धीरे शुद्ध क्रिस्टल बन जाते हैं, और जो भी अशुद्धियाँ हैं, वे द्रव में रह जाती हैं। अंत में क्रिस्टल को छानकर अलग कर लिया जाता है।

उदाहरण: कॉपर सल्फेट, फिटकरी, समुद्री पानी से नमक शुद्ध करना।

क्रिस्टलीकरण वाष्पीकरण से बेहतर क्यों है: कुछ पदार्थ गर्म होने पर जल सकते हैं या टूट सकते हैं। वाष्पीकरण में कुछ अशुद्धियाँ ठोस में रह जाती हैं, लेकिन क्रिस्टलीकरण में केवल शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं।

प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)

क्या है: जब एक मिश्रण में कई पदार्थ हों और उनका उबलने का तापमान अलग-अलग हो, तो उन्हें अलग करने की विधि को प्रभाजी आसवन कहते हैं।

कैसे काम करता है: मिश्रण को कॉलम में धीरे-धीरे गर्म किया जाता है। जो पदार्थ जल्दी उबलता है वह ऊपर की ओर उठता है और ठंडा होकर द्रव में बदल जाता है। धीरे-धीरे हर पदार्थ अलग-अलग ऊँचाई पर इकट्ठा हो जाता है।

उपकरण: फ्लास्क और क्लैंप, तापमापी, कंडेंसर, कॉलम (glass beads से भरा)।

उदाहरण: कच्चे तेल से पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन अलग करना; हवा से ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, आर्गन निकालना।

याद रखने का आसान तरीका: जल्दी उबलने वाला ऊपर आता है, धीरे उबलने वाला नीचे रह जाता है।

क्रोमेटोग्राफी (Chromatography)

क्या है: यह तरीका मिश्रण में मौजूद अलग-अलग रंग या पदार्थ को अलग करने के लिए होता है।

कैसे होता है: सबसे पहले मिश्रण को कागज की पट्टी (filter paper strip) पर रखा जाता है। नीचे पानी डालकर धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हैं। रंग अपनी गति से ऊपर जाते हैं और अलग दिखाई देते हैं।

उपकरण: कागज की पट्टी, कांच की छड़, जार, पेंसिल से रेखा, स्याही का निशान।

उदाहरण: काली स्याही में रंजक अलग करना, पौधों से pigments पृथक करना, खून में ड्रग्स जांचना।

याद रखने का आसान तरीका: सोचो पानी ऊपर चढ़ रहा है और रंग धीरे-धीरे अलग हो जाते हैं।

उर्ध्वपातन (Sublimation)

मतलब: कुछ ठोस पदार्थ सीधे गैस में बदल जाते हैं, बिना पहले पानी या द्रव बनने के।

कैसे होता है: ठोस को गर्म करने पर वह सीधे गैस बन जाता है। दूसरा ठोस जैसा है, वैसा ही रह जाता है।

उदाहरण: अमोनियम क्लोराइड और नमक का मिश्रण। गर्म करने पर अमोनियम क्लोराइड गैस बनकर ऊपर चला जाता है, नमक नीचे बचता है। कपूर और नैफ्थलिन की गोलियाँ भी इसी तरह अलग की जाती हैं।

याद रखने का तरीका: सोचो जो उड़ जाए, वही अलग हो गया। सीधे गैस में बदलना → उर्ध्वपातन।

विशेष बात: केवल कुछ ठोस पदार्थ ही ऐसा कर सकते हैं। यह तरीका सरल और जल्दी होता है।

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