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1. राष्ट्रवाद क्या है?

राष्ट्रवाद वह भावना है जिसमें लोग अपने आप को किसी राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं। लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी भाषा, संस्कृति, इतिहास और धर्म समान हैं। जब लोग इस समानता और सामूहिक पहचान को महसूस करते हैं और इसके लिए गर्व की भावना रखते हैं, तो इसे राष्ट्रवाद कहा जाता है।


2. राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति

राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति फ्रांस में 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हुई। इस क्रांति में फ्रांस में राजतंत्र समाप्त हुआ और गणतंत्र की स्थापना की गई। इस क्रांति ने लोगों में अपनी राष्ट्रीय पहचान के प्रति जागरूकता और समानता की भावना पैदा की।


3. निरंकुशवाद क्या है?

निरंकुशवाद एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें शासक वर्ग पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता। इस प्रकार का शासक अपनी मनमानी निर्णय ले सकता है और अपनी इच्छानुसार शासन चला सकता है। यह शासन केंद्रीकृत, दमनकारी और आम जनता के अधिकारों को नजरअंदाज करने वाला होता है।


4. फ्रेड्रिक सॉरयू कौन थे?

फ्रेड्रिक सॉरयू एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी चित्रकार थे। 1848 ई. में उन्होंने चार चित्रों की श्रृंखला बनाई, जिनमें उन्होंने गणतंत्र, स्वतंत्रता, ज्ञानोदय और राष्ट्र के आदर्शों को चित्रित किया। उनके चित्रों ने लोगों में राष्ट्रीय भावना और लोकतांत्रिक विचारों को फैलाने में मदद की।


5. यूटोपिया (कल्पनादर्श) क्या है?

यूटोपिया का मतलब है एक आदर्श समाज, जहाँ कोई भेदभाव नहीं होता और सभी लोग समान अधिकारों के साथ रहते हैं। यूटोपिया को वास्तविक जीवन में पूरी तरह लागू करना बहुत कठिन है। यूटोपिया के विचारक फ्रेड्रिक सॉरयू थे, जिन्होंने समानता और न्याय पर आधारित समाज की कल्पना प्रस्तुत की।


6. जनमत संग्रह क्या है?

जनमत संग्रह का अर्थ है किसी क्षेत्र के लोगों की राय को इकट्ठा करना। यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार है क्योंकि इसके द्वारा लोगों को अपने प्रतिनिधियों या सरकार के निर्णयों में प्रत्यक्ष भाग लेने का अधिकार मिलता है।


7. नृजातीय क्या है?

नृजातीय का मतलब है किसी समुदाय की साझा नस्ल, जनजातीय या सांस्कृतिक पहचान। इसमें भाषा, रीति-रिवाज, परंपराएँ और सामाजिक मूल्य शामिल होते हैं, जो लोगों को एक समूह के रूप में जोड़ते हैं।


8. फ्रांस में राष्ट्रवाद के विकास के उपाय

फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने नागरिकों में सामूहिक पहचान और राष्ट्रवाद की भावना बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए:

  1. उन्होंने 'पितृभूमि' और 'नागरिक' जैसे विचार फैलाए, जिससे लोगों में एक साथ रहने और समान अधिकारों की भावना पैदा हुई।
  2. उन्होंने फ्रांस के लिए एक नया तिरंगा झंडा अपनाया, जो पुरानी राजकीय पहचान का स्थान ले सके।
  3. उन्होंने 'नेशनल एसेम्बली' का गठन किया, जो सभी नागरिकों के प्रतिनिधियों से बनी और निर्णय लेने में सक्षम थी।
  4. नई स्तुतियाँ, शपथ और शहीदों के गुणगान करके राष्ट्रीय भावना को लोगों में प्रबल किया गया।
  5. पूरे देश में समान कानून और केंद्रीकृत प्रशासन लागू किया गया, जिससे सभी नागरिकों के लिए कानून एक समान हो गया।
  6. पूरे देश में माप-तौल की समान प्रणाली लागू की गई, जिससे व्यापार और लेन-देन आसान हो गया।
  7. स्थानीय बोलियों और भाषाओं की बजाय, फ्रेंच भाषा को पूरे देश में प्रचलित किया गया।

9. फ्रांसीसी क्रांति के मुख्य परिणाम

1789 की फ्रांसीसी क्रांति के बाद फ्रांस में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए:

  1. राजतंत्र समाप्त हुआ और गणतंत्र की स्थापना हुई।
  2. राष्ट्रवाद की भावना फैल गई और समानता की भावना विकसित हुई।
  3. धार्मिक स्वतंत्रता बढ़ी और पादरियों के अधिकार घटाए गए।
  4. राष्ट्रीय सभा की शक्ति बढ़ी और सभी नए कानून इसी सभा द्वारा बनाये गए।
  5. सामंती अर्थतंत्र समाप्त हो गया और नई पूंजीवादी अर्थव्यवस्था आई।
  6. नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की घोषणा की गई।
  7. फ्रांस की क्रांति ने पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद फैलाने में मदद की।

10. नेपोलियन बोनापार्ट कौन थे?

नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस के एक महान सेनानायक थे। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने कई युद्धों में विजय प्राप्त की। बाद में उन्हें फ्रांस का पहला सम्राट घोषित किया गया। उन्होंने अपने शासन में नेपोलियन संहिता लागू की।


11. नेपोलियन संहिता की मुख्य विशेषताएँ

नेपोलियन संहिता के तहत फ्रांस और उसके नियंत्रित क्षेत्रों में निम्नलिखित सुधार किए गए:

  1. जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए।
  2. कानून के सामने सभी नागरिकों को समानता और न्याय मिला।
  3. सामंती व्यवस्था समाप्त की गई और किसानों को भू-दासत्व से मुक्ति मिली।
  4. प्रशासनिक सुधार किए गए और शहरों में संचार और यातायात को सुगम बनाया गया।

12. वियना सम्मेलन (1815)

नेपोलियन की हार के बाद 1815 में ऑस्ट्रिया में वियना सम्मेलन आयोजित किया गया।

  1. इसमें प्रमुख देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए: इंग्लैंड, रूस, प्रशा और आस्ट्रिया
  2. सम्मेलन के मुख्य निर्णय थे:
    • फ्रांस में राजतंत्र की बहाली की गई।
    • पूरे यूरोप में रूढ़िवादी व्यवस्था लागू की गई।
    • नेपोलियन द्वारा हटाए गए पुराने राजतंत्रों को बहाल किया गया।
    • देशों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया गया।
    • जर्मन महासंघ और पोलैंड के हिस्सों का वितरण किया गया।
  3. सम्मेलन की मेजबानी ड्यूक मेटरनिख ने की।
  4. प्रसिद्ध कथन: “जब फ्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।

13. उदारवाद (Liberalism)

उदारवाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो निम्नलिखित चीजों का समर्थन करती है:

  1. कानून के सामने समानता
  2. सभी नागरिकों के लिए मताधिकार
  3. लोकतंत्र और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थन।

14. रूढ़िवाद और समन्वयवाद

  1. रूढ़िवाद: यह विचारधारा परंपराओं और पुराने नियमों को बनाए रखने पर बल देती है। रूढ़िवादी लोग राजतंत्र, चर्च और सामाजिक भेदभाव को स्थिर रखना चाहते हैं।
  2. समन्वयवाद: इसका अर्थ है अलग-अलग विचारों और मतों को समान रूप से मिलाकर संतुलित समाधान निकालना।



15. 1830–1848 का क्रांति युग

यूरोप में 1830 से 1848 तक का समय क्रांति का युग कहलाता है। इस अवधि में कई देशों में निरंकुश और रूढ़िवादी शासन के खिलाफ विद्रोह हुए।

  1. फ्रांस में उदारवादी क्रांतिकारियों ने निरंकुश शासन के खिलाफ विद्रोह किया।
  2. ब्रुसेल्स में भी 1830 में विद्रोह भड़का, जिससे यह नीदरलैण्ड्स से अलग हो गया।
  3. इसी समय इटली और जर्मनी के विभिन्न राज्यों में आंदोलन हुए।
  4. पोलैंड और आयरलैंड में भी रूढ़िवादी और प्रतिक्रियावादी शासन के खिलाफ क्रांतियाँ हुईं।

16. रूपक और राष्ट्रीय प्रतीक

रूपक का अर्थ है किसी अमूर्त विचार या भावना को मूर्त रूप में दर्शाना। राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता के विचारों को लोगों तक पहुँचाने के लिए कलाकार अक्सर रूपकों का उपयोग करते थे।

  1. मारीआन (फ्रांस): मारीआन नारी का रूपक थी, जो स्वतंत्रता, गणतंत्र और न्याय का प्रतीक है। फ्रांस में इसे राष्ट्रीय पहचान और नागरिकों में राष्ट्रवाद जगाने के लिए प्रयोग किया गया।
  2. जर्मेनिया (जर्मनी): जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का प्रतीक थी। यह रूपक स्वतंत्रता, शक्ति, बहादुरी और राष्ट्रवाद को दर्शाता था।

17. राष्ट्रीय पहचान में भाषा और लोक परंपराओं का योगदान

राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक एकता में भाषा और लोक परंपराओं का बहुत महत्व है।

  1. भाषा लोगों को सांस्कृतिक रूप से समान होने की भावना देती है।
  2. लोक परंपराएँ जैसे लोकगीत, लोककविता और लोकनृत्य लोगों को अपने अतीत और संस्कृति से जोड़ती हैं।
  3. यह लोगों में गर्व और एकता की भावना पैदा करती हैं, जिससे राष्ट्रवाद मजबूत होता है।

18. ज्युसेपी मेत्सिनी और इटली का एकीकरण

  1. ज्युसेपी मेत्सिनी इटली के एक महान क्रांतिकारी थे। वह निरंकुश शासन का विरोधी और उदार लोकतंत्र के समर्थक थे।
  2. उन्होंने 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' जैसे गुप्त क्रांतिकारी संगठन बनाए, जिनका उद्देश्य इटली को एकीकृत करना था।
  3. एकीकरण से पहले इटली कई छोटे राज्यों और हैब्सबर्ग साम्राज्य में बँटा हुआ था।
  4. काउंट कैमिलो दे कावूर सार्डिनिया-पीडमॉण्ट के मंत्री थे। उन्होंने कूटनीति और युद्ध के माध्यम से इटली का एकीकरण किया।

19. जर्मनी का एकीकरण

  1. जर्मनी के विभिन्न राज्यों को आर्थिक रूप से जोड़ने के लिए 'जॉलवेराइन' नामक शुल्क संघ स्थापित किया गया।
  2. वर्ष 1848 में फ्रैंकफर्ट संसद ने जर्मनी के लिए एक संविधान का प्रारूप तैयार किया।
  3. 18 जनवरी 1871 को वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम को नवीन जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया।
  4. बिस्मार्क, जो प्रशा के चांसलर थे, ने जर्मनी के एकीकरण में 'खून और खड्ग' की नीति अपनाई।

20. ब्रिटेन में राष्ट्रवाद

ब्रिटेन में राष्ट्रवाद की प्रक्रिया अन्य यूरोपीय देशों से भिन्न थी।

  1. ब्रिटेन में राष्ट्रवाद धीरे-धीरे और शांतिपूर्ण तरीके से विकसित हुआ।
  2. 1688 में आंग्ल संसद ने राजतंत्र की शक्ति सीमित की।
  3. 1707 में स्कॉटिश लोगों को ब्रिटेन में सम्मिलित किया गया।
  4. 1801 में आयरलैंड को ब्रिटेन में शामिल किया गया।
  5. इस तरह ब्रिटेन में राष्ट्रवाद क्रांति की बजाय दीर्घकालीन राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम था।

21. ऑटोमन साम्राज्य और बाल्कन क्षेत्र

  1. ऑटोमन साम्राज्य पश्चिम एशिया, बाल्कन क्षेत्र और उत्तरी अफ्रीका तक फैला था।
  2. यूनानियों ने 1832 में ऑटोमन साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की।
  3. बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवादी तनाव पैदा हुए क्योंकि यहाँ जातीय भिन्नता और यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा थी।
  4. हर राज्य अपने लिए अधिक से अधिक क्षेत्र चाहता था, जिससे राजनीतिक और सैन्य संघर्ष बढ़े।

22. महिलाओं की भूमिका और नारीवाद

  1. राष्ट्रवादी आंदोलनों में महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
  2. उन्होंने अपने राजनीतिक संगठन बनाए, प्रदर्शनों और सभाओं में भाग लिया, और देश के एकीकरण तथा लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया।
  3. इसके बावजूद उन्हें आम तौर पर मताधिकार नहीं मिला
  4. नारीवाद एक ऐसा दर्शन है जो पुरुष और महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता का समर्थन करता है।

23. ऑटोमन साम्राज्य से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: तुर्की शासन के अधीन आने वाला, पश्चिमी एशिया, पूर्वी यूरोप के बाल्कन क्षेत्र तथा उत्तरी अफ्रीका तक फैला साम्राज्य ऑटोमन साम्राज्य कहलाता है। राष्ट्रवाद के उदय के साथ, प्रथम विश्व युद्ध के पहले तक यह कई स्वतंत्र राष्ट्रों में विभाजित हो गया।


24. यूनान का स्वतंत्रता युद्ध क्या था?
उत्तर: यूनान पर ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा था। यूनानियों में राष्ट्रवाद की भावना का संचार हुआ और उन्होंने ऑटोमन साम्राज्य के खिलाफ आंदोलन चलाया। अनेक बुद्धिजीवियों और आंदोलनकारियों के प्रयास से 1832 में यूनान स्वतंत्र हो गया।


25. बाल्कन क्षेत्र में कौन-से देश आते हैं?
उत्तर: ऑटोमन और हैब्सबर्ग साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले देश जैसे—रोमानिया, बुल्गेरिया, यूनान, स्लोवेनिया, सर्विया आदि बाल्कन क्षेत्र में शामिल हैं।


26. बाल्कन प्रदेशों में राष्ट्रवादी तनाव क्यों पनपा?
उत्तर: बाल्कन क्षेत्र में राष्ट्रवादी तनाव कई कारणों से पनपा:

  1. भौगोलिक और जातीय भिन्नता – तुर्क लोग बाल्कन की ईसाई जातियों का शोषण करते थे।
  2. राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार – ऑटोमन साम्राज्य के विघटन से स्थिति विस्फोटक हो गई।
  3. आधुनिकीकरण के प्रयासों में असफलता – सुधारों में असफलता के कारण असंतोष बढ़ा।
  4. राज्यों में एकता का अभाव – हर राज्य अपने क्षेत्र को बढ़ाने की कोशिश करता था।
  5. यूरोपीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा – रूस, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया-हंगरी आदि देशों की प्रतिस्पर्धा ने तनाव और बढ़ाया।

27. राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर: राष्ट्रवादी आंदोलनों में महिलाएँ सक्रिय रूप से भाग लेती थीं। उन्होंने राजनीतिक संगठन बनाए, विरोध सभाओं और जलूसों में भाग लिया, समाचार-पत्र शुरू किए और राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन चलाए। इसके बावजूद उन्हें मताधिकार से वंचित रखा गया। 1848 में फ्रैंकफर्ट संसद की सभा में उन्हें केवल दर्शक दीर्घा में खड़े होने की अनुमति दी गई।


18. 'नारीवाद' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: 'नारीवाद' एक ऐसा दर्शन है, जो स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता के सिद्धांत पर आधारित है।




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