जैव प्रक्रम 10th

जैव प्रक्रम (श्वसन) नोट्स

📘 जैव प्रक्रम (श्वसन)

कक्षा 9 –

🔹 श्वसन क्या है?

श्वसन का मतलब है खाने से ऊर्जा बनाना। हम जो खाते हैं, उसमें ग्लूकोज़ होता है। शरीर उस ग्लूकोज़ को तोड़ता है और ऊर्जा बनाता है। इस पूरी प्रक्रिया का नाम श्वसन है।

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🔹 ग्लूकोज़ का टूटना (श्वसन के चरण)

सबसे पहले ग्लूकोज़ टूटता है। ग्लूकोज़ में छः कार्बन होते हैं। यह टूटकर पायरुवेट में बदल जाता है। पायरुवेट में तीन कार्बन होते हैं। यह प्रक्रम कोशिकाद्रव्य में होता है। इससे थोड़ी सी ऊर्जा निकलती है।

अब पायरुवेट आगे दो तरह से टूट सकता है – ऑक्सीजन के साथ या बिना ऑक्सीजन के।

🔹 दो तरह के श्वसन

वायवीय श्वसन वह होता है जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और भरपूर ऊर्जा बनती है।

अवायवीय श्वसन वह होता है जो बिना ऑक्सीजन के होता है। यह कोशिकाद्रव्य में होता है। इससे कम ऊर्जा बनती है।

🔹 अवायवीय श्वसन के उदाहरण

यीस्ट में अवायवीय श्वसन होता है। इसमें पायरुवेट टूटकर इथेनॉल (शराब), कार्बन डाइऑक्साइड और थोड़ी ऊर्जा बनाता है।

🔹 पौधों में गैसों का आदान-प्रदान

पौधे गैसों का आदान-प्रदान रंध्र के ज़रिए करते हैं। दिन के समय श्वसन से जो कार्बन डाइऑक्साइड बनती है, वह प्रकाश संश्लेषण में इस्तेमाल हो जाती है। इसलिए दिन में कार्बन डाइऑक्साइड बाहर नहीं निकलती, बल्कि ऑक्सीजन बाहर निकलती है। रात के समय प्रकाश संश्लेषण नहीं होता, इसलिए केवल कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।

🔹 जानवरों में श्वसन के अलग-अलग तरीके

  • मछली क्लोम से साँस लेती है। वह मुँह से पानी लेकर क्लोम तक पहुँचाती है। पानी में घुली ऑक्सीजन क्लोम के ज़रिए खून में चली जाती है।
  • कीड़े-मकोड़े ट्रेकिआ से साँस लेते हैं। उनके शरीर में छोटे-छोटे पाइप होते हैं।
  • केंचुआ अपनी त्वचा से साँस लेता है। उसकी त्वचा हमेशा गीली रहती है, जिससे ऑक्सीजन अंदर जा सकती है।
  • मनुष्य और दूसरे स्थलीय जीव फेफड़ों से साँस लेते हैं।

🔹 जलीय जीवों की साँस जल्दी क्यों होती है?

पानी में ऑक्सीजन की मात्रा हवा से बहुत कम होती है। इसलिए मछलियों को जल्दी-जल्दी साँस लेनी पड़ती है। वह एक मिनट में कई बार मुँह खोलती और बंद करती है। हम इंसान एक मिनट में केवल 12 से 20 बार साँस लेते हैं।

मनुष्य का श्वसन तंत्र (बहुत आसान और साफ भाषा में)

हमारे शरीर में हवा सबसे पहले नाक से अंदर जाती है। नाक के अंदर छोटे-छोटे बाल होते हैं, जो धूल और गंदगी को रोक लेते हैं। नाक के अंदर एक चिपचिपा पदार्थ भी होता है, जिसे श्लेष्मा कहते हैं, यह कीटाणुओं को पकड़ लेता है।

नाक से हवा कंठ (गला) में जाती है, और फिर श्वासनली (साँस की नली) में पहुँचती है। यह श्वासनली आगे जाकर दो भागों में बंट जाती है, जिन्हें ब्रोंकाई कहते हैं। ये ब्रोंकाई और छोटी-छोटी नलियों में बंटती जाती हैं, जिन्हें श्वसनिका कहते हैं।

सबसे अंत में ये नलियाँ छोटे-छोटे गुब्बारे जैसे भाग में खुलती हैं, जिन्हें कूपिका (alveoli) कहते हैं। कूपिकाएँ बहुत छोटी होती हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत ज्यादा होती है। अगर इन्हें फैलाया जाए, तो ये लगभग 80 वर्ग मीटर तक जगह घेर सकती हैं। कूपिकाओं की दीवारों पर खून की बहुत सारी नसें होती हैं।

हमारे शरीर की कोशिकाएँ काम करते समय कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) बनाती हैं। यह CO₂ खून के साथ फेफड़ों तक पहुँचती है।

कूपिका में क्या होता है?
कूपिका के अंदर हवा में ऑक्सीजन (O₂) होती है और खून में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) होती है।
अब ऑक्सीजन कूपिका से खून में चली जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड खून से कूपिका में आ जाती है।

फिर जब हम साँस छोड़ते हैं, तो यह कार्बन डाइऑक्साइड शरीर से बाहर निकल जाती है।

👉 आसान याद रखने का तरीका:
नाक → कंठ → श्वासनली → ब्रोंकाई → श्वसनिका → कूपिका → गैसों का आदान-प्रदान

यही पूरा श्वसन तंत्र है, जो हमें जीवित रखने के लिए लगातार काम करता रहता है।

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🔹 हीमोग्लोबिन क्या है?

हमारे लाल रुधिर कणिकाओं के अंदर एक लाल रंग का पदार्थ होता है, जिसे हीमोग्लोबिन कहते हैं। यह ऑक्सीजन से चिपकने की बहुत ताकत रखता है। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेता है और उसे शरीर के उन सभी हिस्सों तक पहुँचाता है जहाँ ऑक्सीजन की कमी होती है। अगर हीमोग्लोबिन न हो, तो खून ऑक्सीजन नहीं ढो सकता।

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⭐ एग्जाम के लिए सबसे ज़रूरी 10 बातें

  1. श्वसन का मतलब है ग्लूकोज़ को तोड़कर ऊर्जा बनाना।
  2. चूने का पानी कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में आने से दूधिया हो जाता है।
  3. यीस्ट में बिना ऑक्सीजन के श्वसन होता है, इसे किण्वन कहते हैं।
  4. ज़ोरदार व्यायाम करने पर पेशियों में लैक्टिक अम्ल बनता है, जिससे क्रैम्प होता है।
  5. वायवीय श्वसन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है और इसमें भरपूर ऊर्जा बनती है।
  6. एटीपी कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है, इसे कोशिका की बैटरी भी कहते हैं।
  7. मछली का श्वसन अंग क्लोम है, और वह जल्दी-जल्दी साँस लेती है।
  8. मनुष्य का मुख्य श्वसन अंग फेफड़ा है।
  9. फेफड़ों में गैसों का आदान-प्रदान कूपिका में होता है।
  10. हीमोग्लोबिन लाल रुधिर कणिकाओं में पाया जाता है और यह ऑक्सीजन पहुँचाता है।

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