मानव पाचन तंत्र class 10th science जैव प्रक्रम
मानव पाचन तंत्र
हम जो भी भोजन खाते हैं, वह हमारे शरीर में एक विशेष प्रक्रिया से गुजरता है, जिसे पाचन (Digestion) कहते हैं। इस प्रक्रिया में भोजन धीरे-धीरे छोटे और सरल कणों में बदल जाता है, ताकि शरीर उसे आसानी से उपयोग कर सके।
🟢 मुँह (Mouth)
सबसे पहले पाचन की शुरुआत मुँह से होती है। हम दाँतों से भोजन को चबाते हैं, जिससे वह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है। मुँह में लार (Saliva) बनती है, जो भोजन को गीला और नरम करती है। लार में एमिलेस एंजाइम होता है, जो स्टार्च को शक्कर में बदलना शुरू करता है। जीभ भोजन को लार के साथ अच्छे से मिलाकर आगे भेजती है।
🟢 ग्रसिका (Food pipe / Esophagus)
इसके बाद भोजन ग्रसिका (Food pipe) से होकर नीचे जाता है। इसमें एक खास तरह की गति होती है, जिसे क्रमाकुंचन गति कहते हैं, जो भोजन को धकेलते हुए आमाशय तक पहुँचा देती है।
🟢 आमाशय (Stomach)
अब भोजन आमाशय (Stomach) में पहुँचता है, जो एक थैली जैसा अंग होता है। यहाँ भोजन को घुमाकर पाचक रसों के साथ मिलाया जाता है। आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) बनता है, जो कीटाणुओं को मारता है और अम्लीय वातावरण बनाता है। साथ ही पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को पचाता है और श्लेष्मा (Mucus) आमाशय को अम्ल से बचाता है। इसके बाद भोजन आगे क्षुद्रांत्र में चला जाता है।
🟢 क्षुद्रांत्र (Small intestine)
क्षुद्रांत्र (Small intestine) पाचन का सबसे महत्वपूर्ण भाग है, जहाँ भोजन का पूरा पाचन होता है। यहाँ यकृत से पित्त रस आता है, जो वसा को छोटे कणों में तोड़ता है। अग्न्याशय से एंजाइम आते हैं, जो प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट को पचाते हैं। आंत्र रस भोजन को पूरी तरह सरल रूप में बदल देता है। अंत में कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में, प्रोटीन अमीनो अम्ल में और वसा फैटी एसिड व ग्लिसरॉल में बदल जाते हैं।
🟢 अवशोषण (Absorption)
इसके बाद आता है अवशोषण (Absorption)। क्षुद्रांत्र की दीवार में छोटे-छोटे उँगली जैसे भाग होते हैं, जिन्हें दीर्घरोम (Villi) कहते हैं। ये पचे हुए भोजन को खून में मिलाते हैं, और खून इसे पूरे शरीर में पहुँचाता है।
🟢 बृहदांत्र (Large intestine)
अब जो भोजन पच नहीं पाता, वह बृहदांत्र (Large intestine) में जाता है। यहाँ से पानी सोख लिया जाता है और बाकी बचा अपशिष्ट गुदा के द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।















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