अध्याय 5 – जैव प्रक्रम class 10th science
📘 अध्याय 5 – जैव प्रक्रम
✳️ 5.2.2 विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
🟢 विषमपोषी किसे कहते हैं?
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें विषमपोषी कहते हैं। ये जीव सीधे या परोक्ष रूप से अपना भोजन पौधों या अन्य जीवों से प्राप्त करते हैं।
उदाहरण के रूप में मनुष्य, सभी जानवर तथा कवक (जैसे मशरूम, यीस्ट) विषमपोषी होते हैं।
🟢 भोजन प्राप्त करने के विभिन्न तरीके
1. शाकाहारी जीव
वे जीव जो केवल पौधों या पौधों से बने पदार्थों को खाते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं।
उदाहरण: गाय, हिरण आदि।
2. मांसाहारी जीव
वे जीव जो अन्य जीवों का मांस खाते हैं, मांसाहारी कहलाते हैं।
उदाहरण: शेर, बाघ आदि।
3. सर्वाहारी जीव
वे जीव जो पौधों और जानवरों दोनों को खाते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं।
उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता आदि।
4. मृतजीवी (Saprophytes)
वे जीव जो सड़े-गले या मृत जैविक पदार्थों से भोजन प्राप्त करते हैं, मृतजीवी कहलाते हैं।
ये अपने शरीर के बाहर एंजाइम छोड़ते हैं और भोजन को बाहर ही पचा देते हैं, फिर उसे अवशोषित कर लेते हैं।
उदाहरण: मशरूम, फफूँद, यीस्ट।
5. परजीवी (Parasites)
वे जीव जो अन्य जीवों के शरीर पर या अंदर रहकर उनसे भोजन प्राप्त करते हैं, परजीवी कहलाते हैं।
ये जीव अपने पोषक जीव (host) को हानि पहुँचाते हैं।
उदाहरण: अमरबेल, जूँ, किलनी, लीच आदि।
🔬 अमीबा में पोषण
अमीबा एक एककोशिकीय जीव है, जिसमें पोषण की प्रक्रिया बहुत सरल होती है।
1. भोजन ग्रहण करना (Ingestion)
अमीबा अपने शरीर से पादाभ (कूटपाद) निकालता है, जो उँगली जैसी संरचनाएँ होती हैं।
इनकी सहायता से वह भोजन को पकड़ लेता है।
2. भोजन को घेरना
पादाभ भोजन को चारों ओर से घेर लेते हैं और उसे कोशिका के अंदर ले जाते हैं।
3. खाद्य रिक्तिका का निर्माण
भोजन के चारों ओर एक थैली बन जाती है, जिसे खाद्य रिक्तिका कहते हैं।
4. पाचन (Digestion)
खाद्य रिक्तिका के अंदर एंजाइम भोजन को सरल पदार्थों में बदल देते हैं।
5. अवशोषण (Absorption)
पचे हुए सरल पदार्थ कोशिकाद्रव्य में फैल जाते हैं और शरीर द्वारा उपयोग किए जाते हैं।
6. उत्सर्जन (Egestion)
अवशेष या अपचित भोजन को अमीबा अपने शरीर से बाहर निकाल देता है।
👉 अमीबा में भोजन ग्रहण करने के लिए कोई विशेष अंग नहीं होता, वह अपने शरीर के किसी भी भाग से भोजन ले सकता है।
🔬 पैरामीशियम में पोषण
पैरामीशियम भी एक एककोशिकीय जीव है, लेकिन इसका आकार निश्चित होता है।
इसके शरीर पर अनेक छोटे-छोटे बाल जैसे संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें पक्ष्माभ (सिलिया) कहते हैं।
ये पक्ष्माभ लगातार हिलते रहते हैं और भोजन को एक निश्चित स्थान (मुखद्वार जैसे भाग) तक पहुँचाते हैं, जहाँ से भोजन शरीर के अंदर जाता है और आगे पाचन की प्रक्रिया होती है।
🧠 अमीबा और पैरामीशियम में अंतर
अमीबा का आकार बदलता रहता है और वह अपने पूरे शरीर से भोजन ग्रहण करता है। जबकि पैरामीशियम का आकार निश्चित होता है और वह केवल एक विशेष स्थान से ही भोजन ग्रहण करता है।
अमीबा में पादाभ होते हैं, जबकि पैरामीशियम में पक्ष्माभ होते हैं।
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