जैव प्रक्रम – उत्सर्जन class 10th

 



📘 जैव प्रक्रम – उत्सर्जन (Excretion)

(मानव में उत्सर्जन – सरल और साधारण नोट्स)


🔹 5.5.1 – मानव में उत्सर्जन

1. मानव उत्सर्जन तंत्र के अंग

मानव उत्सर्जन तंत्र चार मुख्य अंगों से मिलकर बना होता है:

  • वृक्क (Kidney) – 2 → ये रुधिर को छानते हैं और मूत्र बनाते हैं।
  • मूत्रवाहिनी (Ureter) – 2 → ये मूत्र को वृक्क से मूत्राशय तक ले जाती हैं।
  • मूत्राशय (Urinary Bladder) – 1 → इसमें मूत्र जमा होकर रहता है।
  • मूत्रमार्ग (Urethra) – 1 → यह मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है।

👉 वृक्क शरीर में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होते हैं।




2. मूत्र बनने का उद्देश्य

मूत्र बनने का मुख्य उद्देश्य शरीर से वर्ज्य पदार्थों को बाहर निकालना है।

  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) फेफड़ों द्वारा बाहर निकलती है।
  • यूरिया और यूरिक अम्ल जैसे नाइट्रोजनी वर्ज्य वृक्क द्वारा बाहर निकाले जाते हैं।

3. वृक्क की संरचना – वृक्काणु (Nephron)

वृक्क में बहुत सारे छोटे-छोटे निस्यंदन एकक होते हैं, जिन्हें वृक्काणु (Nephron) कहा जाता है।

वृक्काणु के मुख्य भाग:

  • ग्लामेरुलस (Glomerulus) → पतली भित्ति वाली केशिकाओं का गुच्छ, जहाँ छानने की प्रक्रिया होती है।
  • बोमन संपुट (Bowman’s Capsule) → कप के आकार की संरचना, जो ग्लामेरुलस को घेरे रहती है।
  • नलिकाकार भाग (Tubule) → इसमें मूत्र आगे बढ़ता है और आवश्यक पदार्थ वापस शरीर में चले जाते हैं।
  • संग्राहक वाहिनी (Collecting Duct) → यह मूत्र को एकत्र करके आगे भेजती है।







4. मूत्र निर्माण की प्रक्रिया

मूत्र बनने की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में होती है:

(1) निस्यंदन (Filtration)
रुधिर ग्लामेरुलस में आता है और छानकर बोमन संपुट में पहुँच जाता है।

(2) प्रारंभिक मूत्र (Filtrate)
इसमें ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और अधिक मात्रा में जल होता है।

(3) पुनरवशोषण (Reabsorption)
जैसे-जैसे मूत्र नलिका में आगे बढ़ता है, शरीर के लिए आवश्यक पदार्थ जैसे ग्लूकोज़, जल और लवण वापस रुधिर में चले जाते हैं।

👉 कितना जल वापस लिया जाएगा, यह शरीर की आवश्यकता पर निर्भर करता है।


5. मूत्र का भंडारण और निष्कासन

  • मूत्राशय मूत्र को कुछ समय तक जमा करके रखता है।
  • जब मूत्राशय भर जाता है, तो मूत्रमार्ग के माध्यम से मूत्र बाहर निकलता है।
  • यह प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित होती है, इसलिए हम कुछ समय तक मूत्र को रोक सकते हैं।




✅ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • उत्सर्जन → शरीर से वर्ज्य पदार्थ बाहर निकालना
  • वृक्क → मूत्र बनाता है
  • वृक्काणु (Nephron) → वृक्क की क्रियात्मक इकाई
  • ग्लामेरुलस → यहाँ निस्यंदन होता है
  • पुनरवशोषण → आवश्यक पदार्थ वापस शरीर में जाते हैं
  • मूत्रवाहिनी → वृक्क से मूत्राशय तक
  • मूत्राशय → मूत्र का संग्रह
  • मूत्रमार्ग → मूत्र बाहर निकालता है



📊 त्वरित तुलना

  • CO₂ → फेफड़ों से बाहर
  • यूरिया, यूरिक अम्ल → वृक्क से बाहर

🔹 वृक्काणु का प्रवाह (Flow)

रुधिर → ग्लामेरुलस → बोमन संपुट → नलिका → संग्राहक वाहिनी → 
मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग → बाहर





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