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प्रश्नावली 8.3 प्रश्नावली 8.3 1. त्रिकोणमितीय अनुपातों sin A , sec A और tan A को cot A के पदों में व्यक्त कीजिए। प्रश्नावली 8.3 2. ∠A के अन्य सभी त्रिकोणमितीय अनुपातों को sec A के पदों में लिखिए। प्रश्नावली 8.3 3(i). 9 sec 2 A - 9 tan 2 A बराबर है: (A) 1 (B) 9 (C) 8 (D) 0 प्रश्नावली 8.3 3(ii). (1 + tan θ + sec θ) × (1 + cot θ - cosec θ) बराबर है: (A) 0 (B) 1 (C) 2 (D) -1 प्रश्नावली 8.3 3(iii). (sec A + tan A)(1 - sin A) बराबर है: (A) sec A (B) sin A (C) cosec A (D) cos A प्रश्नावली 8.3 3(iv). (1 + tan 2 A) / (1 + cot 2 A) बराबर है: (A) sec 2 A (B) -1 (C) cot 2 A (D) tan 2 A प्रश्नावली 8.3 4(i). (cosec θ - cot θ) 2 = (1 - cos θ) / (1 + cos θ) प्रश्नावली 8.3 4(ii). (cos A / (1 + sin A)) + ((1 + sin A) / cos A) = 2 sec A प्रश्न...
प्रश्नावली 8.3 प्रश्नावली 8.3 1. त्रिकोणमितीय अनुपातों sin A, sec A और tan A को cot A के पदों में व्यक्त कीजिए। प्रश्नावली 8.3 2. ∠A के अन्य सभी त्रिकोणमितीय अनुपातों को sec A के पदों में लिखिए। प्रश्नावली 8.3 3(i). 9 sec² A - 9 tan² A बराबर है: (A) 1 (B) 9 (C) 8 (D) 0 प्रश्नावली 8.3 3(ii). (1 + tan θ + sec θ)(1 + cot θ - cosec θ) बराबर है: (A) 0 (B) 1 (C) 2 (D) -1 प्रश्नावली 8.3 3(iii). (sec A + tan A)(1 - sin A) बराबर है: (A) sec A (B) sin A (C) cosec A (D) cos A प्रश्नावली 8.3 3(iv). (1 + tan² A) / (1 + cot² A) बराबर है: (A) sec² A (B) -1 (C) cot² A (D) tan² A प्रश्नावली 8.3 4(i). (cosec θ - cot θ)² = (1 - cos θ...

Math chapter 8.2 10th

प्रश्नावली 8.2 प्रश्न 1 निम्नलिखित के मान निकालिए : sin 60° cos 30° + sin 30° cos 60° 2 tan² 45° + cos² 30° - sin² 60° cos 45° sec 30° + cosec 30° sin 30° + tan 45° - cosec 60° sec 30° + cos 60° + cot 45° 5 cos² 60° + 4 sec² 30° - tan² 45° sin² 30° + cos² 30° Reprint 2025-26 प्रश्न 2 सही विकल्प चुनिए और अपने विकल्प का औचित्य दीजिएः 2 tan 30° 1 + tan² 30° = (A) sin 60° (B) cos 60° (C) tan 60° (D) sin 30° 1 - tan² 45° 1 + tan² 45° = (A) tan 90° (B) 1 (C) sin 45° (D) 0 sin 2A = 2 sin A तब सत्य होता है, जबकि A बराबर है: (A) 0° (B) 30° (C) 45° ...

Sci 9 chptet 2

कक्षा 9 विज्ञान नोट्स कक्षा 9 विज्ञान नोट्स द्रव्यमान संरक्षण का नियम क्या कहता है यह नियम: किसी रासायनिक प्रतिक्रिया में जितना वजन शुरू में होता है, उतना ही प्रतिक्रिया के बाद भी रहता है। कुल वजन कभी घटता या बढ़ता नहीं है। आसान शब्दों में: जब हम किसी पदार्थ को बदलते हैं या नया पदार्थ बनाते हैं, तो सारे पदार्थों का कुल वजन बराबर रहता है। उदाहरण: लकड़ी जलना: लकड़ी जलती है → राख + धुआँ + गैस। कुल वजन = लकड़ी + हवा → बराबर है। पानी बनाना: 2 ग्राम हाइड्रोजन + 16 ग्राम ऑक्सीजन → 18 ग्राम पानी। याद रखने का तरीका: “कुछ बदल सकता है, लेकिन वजन नहीं बदलता।” धातु और अधातु धातु (Metals): सोनेरस होती हैं यानी किसी वस्तु से मारने पर ध्वनि करती हैं। ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं। नम्य और तन्य होती हैं यानी तार की तरह खींची जा सकती हैं। उदाहरण: सोना, लोहा। अधातु (Non-metals): ध्वनि नहीं निकालतीं, भंगुर और नाज़ुक होती हैं। ऊष्मा और विद्युत की खराब चालक होती हैं। उदाहरण: ऑक्सीजन, फॉस्फोरस। उपधातु (Metalloids): धातु और अधातु के बीच के गुण दिखाते हैं। क...

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पृथक्करण और विलयन पृथक्करण और विलयन के तरीके क्रिस्टलीकरण (Crystallisation) क्या है: क्रिस्टलीकरण एक तरीका है जिससे हम किसी मिश्रण में से शुद्ध ठोस पदार्थ के क्रिस्टल अलग कर सकते हैं और अशुद्धियाँ छोड़ दी जाती हैं। कैसे करते हैं: सबसे पहले मिश्रण में मौजूद पदार्थ को पानी या किसी उपयुक्त द्रव में घोलते हैं। इस घोल को गरम करके पूरी तरह घुला लेते हैं। फिर इसे ठंडा होने देते हैं या रात भर छोड़ देते हैं। धीरे-धीरे शुद्ध क्रिस्टल बन जाते हैं, और जो भी अशुद्धियाँ हैं, वे द्रव में रह जाती हैं। अंत में क्रिस्टल को छानकर अलग कर लिया जाता है। उदाहरण: कॉपर सल्फेट, फिटकरी, समुद्री पानी से नमक शुद्ध करना। क्रिस्टलीकरण वाष्पीकरण से बेहतर क्यों है: कुछ पदार्थ गर्म होने पर जल सकते हैं या टूट सकते हैं। वाष्पीकरण में कुछ अशुद्धियाँ ठोस में रह जाती हैं, लेकिन क्रिस्टलीकरण में केवल शुद्ध क्रिस्टल बनते हैं। प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) क्या है: जब एक मिश्रण में कई पदार्थ हों और उनका उबलने का तापमान अलग-अलग हो, तो उन्हें अलग करने की विधि को प्रभाजी आसवन कहते हैं। कैसे काम...

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विलयन और पृथक्करण के तरीके विलयन और पृथक्करण के तरीके विलयन के प्रकार वास्तविक विलयन (True Solution) : इसमें कण बहुत छोटे होते हैं, लगभग 10⁻⁹ मीटर। यह पारदर्शी होता है और स्थायी रहता है। इसमें कण छानन (Filtration) से अलग नहीं किए जा सकते। उदाहरण: पानी में चीनी घुला हुआ। टिंडल प्रभाव नहीं दिखता। कोलाइडल विलयन (Colloidal Solution) : इसमें कण मध्यम आकार के होते हैं। यह देखने में समांगी मिश्रण लगता है लेकिन अपारदर्शी होता है। यह भी स्थायी रहता है। इसमें टिंडल प्रभाव दिखाई देता है। कण छन्ना से नहीं निकल सकते। उदाहरण: दूध, रक्त। निलम्बन (Suspension) : इसमें कण बड़े होते हैं, आसानी से नंगी आँखों से दिखाई देते हैं। यह अस्थायी विलयन होता है। कण समय के साथ नीचे बैठ जाते हैं। इसे छानन (Filtration) से अलग किया जा सकता है। टिंडल प्रभाव कभी दिखाई दे सकता है, कभी नहीं। उदाहरण: पानी में बालू या रेत। याद रखने का आसान तरीका: छोटा कण, पारदर्शी, स्थायी → True Solution; मध्यम कण, अपारदर्शी, स्थायी, टिंडल दिखाई दे → Colloid; बड़ा कण, अलग दिखाई दे, अस्थायी, छानन से अलग हो जाए → Suspension...

Sci class 9th chapter 2

शुद्ध पदार्थ और मिश्रण शुद्ध पदार्थ और मिश्रण शुद्ध पदार्थ (Pure Substance) "शुद्ध" का मतलब है पदार्थ में कोई मिलावट न होना। (लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से, धरती पर सभी वस्तुएँ किसी न किसी मिश्रण से बनी होती हैं।) उदाहरण: जल, दूध, वसा आदि। शुद्ध पदार्थ में सभी कण एक ही प्रकार के होते हैं। इसका मतलब: एक शुद्ध पदार्थ केवल एक ही तरह के कणों से बना होता है। शुद्ध पदार्थ को भौतिक प्रक्रियाओं (जैसे छानना, वाष्पीकरण) से अलग नहीं किया जा सकता। मिश्रण (Mixture) परिभाषा: मिश्रण वह पदार्थ है जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर बने हैं, लेकिन ये रासायनिक रूप से जुड़े नहीं होते। विशेषताएँ: अलग-अलग पदार्थ अलग दिखाई देते हैं या अलग तरीके से महसूस होते हैं। इसे भौतिक प्रक्रियाओं से अलग किया जा सकता है। उदाहरण: वायु (ऑक्सीजन + नाइट्रोजन + अन्य गैसें), पानी में नमक, मिट्टी में रेत। विलयन (Solution) जब दो या दो से अधिक पदार्थ पूरा मिल जाएँ और अलग न दिखाई दें, तो वह विलयन कहलाता है। यह समांगी मिश्रण होता है। उदाहरण: पानी में चीनी घुला हुआ → चीनी का पानी, नींबू पा...